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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

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DevanagariHindipublished737 pages

Page 628 of 737

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Page 628

( २४२ )
येन गुणे¹ शेषयुते² छेदः³ शुध्यति हृत⁴ स्वगुणकेन ।
तद्भुक्तं⁵ शेषं फलमेव शेषाद् ग्रहद्युगुणैः⁶ ॥ २६ ॥
राश्यंशकला विकला शेषात्कथितादभीष्टतोनष्टात् ।
यः साध्यद्युपरिमानं¹ समध्यमा⁴ कुट्टकज्ञः² स ॥ ३० ॥
इति श्री कुट्टक प्रकरणम्⁵

२६. (घ) १. गुण (ग) गुणः for (गुणे) २. युतच्छेद (ग) हृताच्छेदः for (युते छेदः)
३. गणैः (ग) गणौ for (गुणैः)
(ग) (वि०—इसकी श्लोक संख्या २४ है) ४. हृदः for (हृत)
५. न तदुक्तं for (तद्भुक्तं) ६. फलमेवं for (फलमेव)
(च) १. गुणों शेषयुतां for (गुणे शेषयुते)
४. हृतः for (हृत) ३. द्युगणैः for (द्युगुणैः)
(ङ) १. (वि०—इसकी क्रम संख्या २४ है)
१. गुणः for (गुणे) २. युतश्छेदः for (युते छेदः)
४. हृतः for (हृत) ७. शेषाद्ग्रह for (शेषाद्ग्रह)
३. द्युगणौ for द्युगुणैः)
३०. (घ) १. त्युपरिमान् (ग) त्युपरिधमान् for (द्युपरिमान्)
५. वि०—मूल में 'इति श्री' पद नहीं है ।
२. कुट्टकज्ञः (ग) for (कुट्टकज्ञः स)
(ग) (वि—इसकी श्लोक संख्या २३ है)
३. विकलांशशेषात् for (विकलाशेषात्)
४. समध्यमान् for (समध्यमा)
(च) १. साध्यत्युपरिमान् for (साध्यद्युपरिमान्)
४. समध्यमात् for (समध्यमा) ५. 'इति श्री' लुप्त
६. कुदक for (कुट्टक)
(ङ) (वि०—इसकी क्रमसंख्या २३ है)
७. नष्टान् for (नष्टात्) १. साध्यत्युपरितनान् for (साध्यद्युपरिमान्)
४. समध्यमान् for (समध्यमा)
२. कुट्टकज्ञः for (कुट्टकज्ञः) ५. 'इति - से—णाम्' तक सब लुप्त ।