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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

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DevanagariHindipublished737 pages

Page 629 of 737

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Page 629

( २४३ )
<sup>५</sup> <sup>१</sup> <sup>६</sup>
अथ धनर्ण श्रुत्यानां संकलना
<sup>८</sup>धनयोर्धनमृणयोर्<sup>७</sup>धनर्णयोरन्तरं <sup>२</sup>समैक्य<sup>६</sup>खं ।
<sup>३</sup>वर्गाँक्य<sup>१०</sup>मृणं धनशून्ययोः <sup>४</sup>दूनं शून्ययोः शून्यम् ॥ ३१ ॥
<sup>१</sup>ऋणमधिकाद् विशोध्यं धनं धनाहृणमृणादधिकमूनात् ।
व्यस्तं तदन्तरं <sup>२</sup>वा <sup>४</sup>ऋणं <sup>३</sup>धनं न मृण भवति ॥ ३२ ॥
३१. (घ) १. शून्यानां for (श्रुत्यानां)
२. समैक्यं (ग) for (समैक्य)
३. खर्णैक्य (ग) स्वर्णैक्यमृण for (वर्गाँक्यमृणं)
४. द्धूनं (ग) for (दूनं)
(ग) (वि०—इसकी श्लोक संख्या ३० है)
५. 'अथ' से 'संकलना' तक लुप्त है।
६. स्वं for (खं)
(च) ५. अथधनर्ण्य for (अथधनर्ण)
१. शून्यानां संकलनाः for (श्रुत्यानां सकलना)
७. धनर्ण्ययो for (धनर्णयो) २. समैक्यं for (समैक्य)
३. खवर्णैक्य for (वर्गाँक्य) ४. द्धूनं for (दूनं)
(ङ) १. शून्यानां for (श्रुत्यानां) ४. “दूनं” लुप्त
६. सङ्कलनम् for (संकलना)
८. +मृण+ २. समैक्यं for (समैक्य)
३. ऋणमैक्यं च for (वर्गाँक्य) १०. धनमृण for (मृणं)
३२. (घ) १. ऊन (ग) (च) (ङ) for (ऋण)
२. खाहृणं (ग) (च) for (वा ऋणं)
३. 'ण' को लिखना भूल गया
(ग) (वि०—इसकी श्लोक संख्या ३१ है)
४. धनं धनमृणं भवति for (धनं न मृणभवति)
(च) ३. नमृभति for (न मृणभवति)
(ङ) २. स्याहृणं for (वा ऋणं) ३. धनमृणं for (नमृण)