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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

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DevanagariHindipublished737 pages

Page 572 of 737

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Page 572

( १८६ )
कर्णाहते¹ व्यासाद्धं भुजज्यया गुणितमाप्तधनुराद्यैः² ।
प्रोह्यदला³द्वितये⁴ षड्राशियुतं⁵ तृतीयपदे ॥ १७ ॥
चक्रत्रोह्य चतुर्थे स्फुटोच्चयोरन्तरं स्वमन्दोच्चे² क्षेप्यम्⁵ ।
शीघ्रं शोध्यं तत्स्पष्टं⁶ पूर्ववच्छेषम्³ ॥ १८ ॥
मध्यस्फुटांतरकला बाहुफलं भवति तीक्ष्णकिरणस्य ।
स्फुटभुत्तघार्कादीनां¹ भुजान्तरं क्षयधनं रविवत् ॥ १६ ॥

१७. (घ) १. कर्णाहृतं (ग) (ङ) for (कर्णाहते) २. राद्यैः (ग) राद्ये for (राद्यैः)
३. भदला (ग) (ङ) for (दला)
(ग) (वि० यहां यह श्लोक १६ की संख्या पर अंकित है ।)
४. द्वितीये (ङ) for (द्वितये) ५. षड्राशियुत for (षड्राशियुतं)
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