Skip to content
SarvaKosh
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

Report a copyright issue

DevanagariHindipublished737 pages

Page 571 of 737

Read in context
Page 571

( १८५ )
को¹ट्यांत्यफलाद्यै²क्यं मकरादावंतरं कुलि³रादौ ।
तद्बाहुज्याकृत्योः संयोगपदं भवति कर्णः⁴ ॥१४॥
प्रतिमंडलपदमाद्यं ग्रहत्रयं सांत्यधनुरतोऽन्यच्च² ।
चक्रा⁵र्द्धांतमतोऽन्यद्याद्यभ³चक्रांतं⁴ मंत्यमतः ॥ १५ ॥
त्रिभनेवां¹त्यफलधनुर्युतमाद्यं नवममं² तृतीयपदमून ।
द्विचतुर्थेषु द्वादशभागिनि⁴प्रतिमंडलपदानि ॥१६॥

१४. (घ) १. कोटद्यंत्य (ग) for (कोट्यांत्य)
२. फलचैक्यं (ग) फलज्यैक्यं for (फलाद्यैक्यं)
३. कुलीरादौ (ग) (च) (ङ) for (कुलिरादौ)
(च) १. कोटद्यांत्य फलाद्यैकं for (कोट्यांत्यफलाद्यैकं) ४. कण्यर्थः for (कर्णः)
(ङ) १. कोटचन्त्य for (कोट्यांत्य) २. फलज्यैक्यं for (फलाद्यैक्यं)
१५. (घ) १. ग्रहत्रयं (ग) गृहत्रयं for (ग्रहत्रयं)
२. रतोऽन्यच्च (ग) रतोन्यश्च for (रतोऽन्यच्च)
३. मतोन्यद्वद्याद्यभ (ग) for (मतोऽन्यद्याद्यभ)
४. चक्रांतमंत्यमतः (ग) for (चक्रांतंमंत्यमतः)
(ग) ५. चक्रार्धंत for (चक्रार्द्धांत)
(च) १. गृहत्रयं (ङ) for (ग्रहत्रयं)
(ङ) ५. चक्र धर्मनेनोनं द्वितृतीयं चतुर्थमाद्यसमम् for (चक्रार्द्धांतमतोन्द्यद्याद्यभच-
क्रांतं मंत्यमतः)
१६. (घ) १. त्रिभमेवांत्य for (त्रिभनेवांत्य) २. नवमभम् for (नवममं)
३. मूनम् (ङ) for (मून) ४. भानि for (भागिनि)
(ग) यह श्लोक इस प्रति में नहीं है ।
(च) १. त्रिभमेवांत्य for (त्रिभनेवांत्य) ४. द्वदशभानि for (द्वादशभागिनि)
(ङ) १. त्रिभमन्त्य for (त्रिभनेवांत्य) २. नवमं for (नवममं)
४. षड्द्वादशभानि for (षुद्ध्वादशभागिनि)