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सर्वकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

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DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

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( १३२ )
बाहु संयोगांतरमन्नाशंक्‌वग्रयोः समान्यैदिशोः ।
कर्णोद्दिग्ज्येकोटिं स्वकर्णभुजकृतिविशेषपदे ॥ ५८ ॥
कोटिभुजकर्णशंकु षष्टि गुणाध्वाहहता मध्यात् ।
कोटि पृथक्प्रसार्ये प्राच्यां प्रागपरयोः पश्चात् ॥ ५६ ॥

५८. (घ) १. माग्रो शंकुग्राह्याः (ग) मग्राशंक्‌वग्रयो for (मन्नाशंक्‌वग्रयोः)
२. सामान्यदिशोः for (सम्मान्यदिशोः)
३. दृग्ज्येकोटि (ग) कर्णौ दृग्येज्‍येकोटि for (कर्णोद्दिग्ज्येकोटिं)
४. वेशेषपदे for विशेषपदे)
(ग) ५. वाहुः for (बाहु)
(च) १. माग्राशंकुग्रह्योः for (मन्नाशंक्‌वग्रयोः)
२. सामान्यदिशोः for समान्यदिशोः)
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