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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

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DevanagariHindipublished737 pages

Page 394 of 737

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Page 394

( ८ )
रविभगणा रव्याब्दा द्वादशगुणिता भवन्ति रविमासाः ।
४
५१०४०००००००
भगणांतरं २ रवींद्वोः ३ शशिमासाः ५३४३३३००००० १
सूर्यमासोनाः ॥ २३ ॥
अधिमासाः १५६३३००००० शशिमासास्त्रिंशद्गुणिता
१
१६०२६६६०००००० भवन्ति शशिदिवसाः ।
शशिसावनदिवसान्तरमवमानि तिथिः शशांकदिनन् ॥ २४ ॥
२
२५०८२५५०००
सावनमुदयादुदयो १ ५ भानां चाक्षं २ नृवत्सरोरु कश्चिद् ३ ।
पितृदिवसाः ५ शशिमासा दिव्यानि दिनानि रविभगणाः ॥ २५ ॥

२३. (घ) १. यह संख्या यहाँ श्लोक की समाप्ति के उपरांत रक्खी गई हैं। (ग) (च)
(क) २. भगणांतर (च) for (भगणांतरं)
३. रवींदोः for (रवींद्वोः)
४. संख्या मूल में लुप्त है, परन्तु टीका में अंकित है।
१. मूल में संख्या लुप्त है, परन्तु टीका में अंकित है।
(च) ३. रविदोः for (रवींद्वोः)
(ख) “रविभगणरव्यब्दा द्वादशगुणिता भवंति ।
रविमासाः भगणांतरे रवींद्धोः शशिमासाः सूर्यमासो ना ॥ २३ ॥”
यह श्लोक अधिक है।
(ङ) यह श्लोक अंकित है।
२४. (घ) १. यह संख्या यहाँ पहली पंक्ति के समाप्त होने पर लिखी गई हैं (ग) (च)
२. २५०८२५५०००० for (२५०८२५५०००)
(क) मूल की तीनों संख्याएं लुप्त हैं, टीका में क्रमशः निम्नांकित हैं -
५३४३३०००००, १६०२६६६००००००, २५०८२५५००००
२५. (घ) १. सवन (च) for (सावन)
२. चाक्ष्यं (ग) (क) वार्क्षं (ख) वक्षा for (चाक्षं)
३. र्काब्दः (ग) (क) (ख) र्काब्दः for (कश्चिद्)
(ग) ४. पितृदिवसा for (पितृदिवसाः)
(क) ५. दुदयं for (दुदयो)
(च) २. चाक्ष्यं for (चाक्षं) ३ कश्चिचः for (कश्चिद्)