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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

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DevanagariHindipublished737 pages

Page 395 of 737

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Page 395

( ६ )
कल्प परार्ध¹मनवः षट्क⁶स्य गताश्च⁷तुर्युगत्रिघनाः² ।
त्रीणि कृतादीनि कालो³ गौगैक⁴गुणाः शकान्ते⁵ऽब्दाः⁸ ।। २६ ।।
१८५२४१६०००, ११६६४००००, ३१७६

२६. (घ) १. परार्द्ध (ग) कल्पापरार्द्ध ४३२००००००००००००००००००००० for
(परार्धमनवः)
२. घटा (ग) घनः ११६६४०००० (क) घनः (ख) त्रिघनम् for (घनाः)
३. काले (ग) कले (क) कलौ (ख) कलेर्गोगैकगुणाः for (कालो गोगैकगुणाः)
४. गोगैः (ग) गोंगैक गुणाः ३१७६ for (गोगैकगुणाः)
५. अतिरिक्त संख्या + ३८८८००० +
(ग) ६. १८५२४१६०० for (१८५२४१६०००)
७. गताश्चचतुर्युग for (गताश्चतुर्युग)
८. + ३८८८००० +
(वि० - उपर्युक्त संख्याएं 'ग' में श्लोक के अन्तर्गत ही हैं)
(क) १. परार्द्ध for (परार्ध)
६. ऽब्दः for (ऽब्दाः) (ख) सकनृपांते ऽब्दाः for (शकान्ते ऽब्दाः)
वि० मूल में संख्याएं लुप्त हैं, टीका में क्रमशः हैं-
१००००००००००००००००, २७, १७२८०००, ३१२६६०००,
८६४०००, ३१७६.
(ख) १. कल्पपरार्द्ध for (कल्पपरार्ध)
(च) १. परार्द्ध ² गताश्चतुर्युगत्रिघत for (गताश्चतुर्युगत्रिघनाः)
३. काले for (कालो) ४ गोगैः कगुणाः for (गोगैकगुणाः) ६ शकांतेऽब्दाः for
शकांतेऽब्दाः)
(घ) ग्रहनक्षत्रोत्पत्ति ब्रह्मदिनादौ दिनक्षये प्रलयः ।
यस्मात्कल्पस्तस्माद्ग्रह¹गणिते कल्पयाताब्दाः² ।। २७ ।।
(वि०) (यह श्लोक १६०२ ई० में प्रकाशित 'ब्राह्मस्फुट सिद्धान्त' में नहीं है । यह
संस्करण क्वींस कालेज के प्रौफेसर महामहोपाध्याय सुधाकर द्विवेदिकृत नूतन-
तिलक समेत 'मैडिकल हाल प्रैस में मुद्रित हुआ--ब्राह्मस्फुट सिद्धान्त के
साथ इसमें ध्यानग्रहोपदेशाध्याय' भी प्रकाशित है)
(वि०) यह श्लोक (ग) तथा (क) पांडुलिपियों में निम्नांकित पाठान्तरों के
साथ उपलब्ध है—
(ग) १. ग्रहः for (ग्रह); (क) २. +स्युः+