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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

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DevanagariHindipublished737 pages

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Page 393

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शशियमशरा ५२१<sup>४</sup> गुणरसा ६३ स्त्रिनंदवसवः<sup>३</sup>
८६३<sup>४</sup> समुद्रवसुविषयाः ५८४<sup>५</sup> ।
चन्द्रादीनां पश्चात् <sup>१</sup>व्रजतोऽश्विन्यादिभगणस्य ॥ २१ ॥<sup>२</sup>
<sup>३</sup>परिवर्त्ता खचतुष्टय <sup>५</sup>शराब्धिरसगुणयम द्विवसु
तिथयः । १५८२२३ । ६४५००००<sup>१</sup>
रविभगणोना भानोः सावन दिवसाः <sup>२</sup>कुदिवसास्ते ॥ २२ ॥
४३२००००००<sup>३</sup>
१५७७६१६४५००००

२१. (घ) १. ब्रजनोश्विन्यादि for (व्रजतोऽश्विन्यादि)
२. (१६, २०. तथा २१ श्लोकों के अन्तर्गत आई हुई संख्याएं यहाँ एक ही
स्थान पर दे दी गई हैं)
(ग) ३. स्त्रिनंदवसव for (स्त्रिनंदवसवः)
४