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बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans

by नरपति नाल्ह

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DevanagariHindipublished315 pages

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Page 50

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शताब्दी (विक्रम की) के अन्त में तुर्किस्तान के बादशाहों से ले
लिया था जिस बात का इस पर पूरा अधिकार था कि वह बीसलदेव को देने से
इन्कार करता। अजमेर का शहर भोजदेव के बहुत पीछे बस कर चौहान राजाओं
की राजधानी हुआ था। संवत् १२२० वि० के लगभग वह--जब कि गुजरात
का चालुक्य राजा कुमारपाल, चौहान राजा अजयपाल का पीछा कर चढ़ गया
था—रघुवंशियों की राजधानी अजमेर नहीं थी क्योंकि प्रबन्धचिन्तामणि के कर्त्ता
मेरुतुंग ने अजयपाल को नागौर व शाकम्भरी का सपादलक्षीय राजा लिखा
था। इतना अवश्य है कि अजमेर का नगर अजयपाल के पिता अजयराज ने
उस समय बसा लिया था, इत्यादि सबूतों से स्पष्ट है कि बीसलदेव रासो
किसी बीसलदेव के समय में बना हुआ नहीं किन्तु पीछे से किसी ने लिख
दिया हो और आश्चर्य नहीं कि यह ग्रन्थ पृथ्वीराज रासो के पीछे बना हो क्योंकि
उसी के अनुसार बीसलदेव रासो में भी बीसलदेव को परमार और यादव कुल
की दो रानियाँ होनी लिखी हैं, और सिवा इसके कि राजा बीसलदेव ने राजा
भोज की कन्या राजमती से विवाह किया अन्य इतिहास-सम्बन्धी कोई बात
इसमें नहीं प्राप्त होती है। ग्रन्थ की पद रचना और भाषा के विषय में इस
समय तक ठीक-ठीक नहीं कहा जा सकता जबतक कि संपूर्ण ग्रन्थ न पढ़ा जाये।"
ऐतिहासिक तथ्यों पर विचार करते समय हमें यह देखना होगा कि जिन
दोनों रूपान्तरों को आधार मान कर सम्प्रति सम्पादन का कार्य किया गया है
उनमें कौन-कौन सी घटनाएँ दोनों में समान हैं। तथा कौन सी ऐसी घटना है
जो प्रथम रूपान्तर में है, द्वितीय में नहीं और द्वितीय में है प्रथम में नहीं।
विश्लेषण करने पर ऐसा होता है कि प्रथम रूपान्तर की प्रायः सभी घटनाएँ
द्वितीय रूपान्तर में पाई जाती हैं। तथा द्वितीय रूपान्तर में उनके अतिरिक्त
और भी अन्य घटनाओं का वर्णन है।
दोनों रूपान्तरों में समान रूप से पाई जाने वाली ऐतिहासिक घटनाओं में
से प्रथम और प्रमुख घटना है चौहान वंशीय बीसलदेव का धार के राजा पर-
मार वंशीय भोज की पुत्री राजमती के साथ विवाह का होना। इस घटना के
साथ ही साथ तत्सम्बन्धी कई एक प्रश्न उठ खड़े होते हैं। बीसलदेव से कवि
का तात्पर्य किस बीसलदेव से है क्योंकि इतिहास में चार बीसलदेव हो चुके हैं।
दूसरा प्रश्न राजा भोज का है क्योंकि इतिहास-प्रसिद्ध राजा भोज का समय कब
से कब तक था तथा समय स्थिर हो जाने के पश्चात् वह किस बीसलदेव का
समकालीन था, इत्यादि बातों पर विचार करना आवश्यक हो जाता है। सुज्ञेय