Skip to content
SarvaKosh
बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans

by नरपति नाल्ह

Report a copyright issue

DevanagariHindipublished315 pages

Page 19 of 315

Read in context
Page 19
  • ११ -
    रचना-तिथि—संवत् तेरसत्तौतरै जाणि । भसह
    कविसर सरसीय बांणि । गुहगुथ्या बहुभाण का । सुक पंचमी
    नह श्रावण मास । हस्त नक्षत्र रविवार सुं शुभ दि जोसी से
    जोडियउ रास ।
    [ गुप्त : पं० समूह नं० २, संकेत "मू०" ] [ १८ ] नाम—बीसलदे रास । कागज—देशी का
    बना हुआ । पन्ने—दो दोनों तरफ लिखे हुए । आकार—
    १० इं० × ४३/८ इं० । पंक्तियाँ—सत्तरह प्रत्येक पृष्ठ पर ।
    छन्द-संख्या—३८ सुद्ध पूरे तथा ३९ वें का प्रारम्भ ।
    प्रकार—पुराना, प्रायः ठीक, अपूर्ण । अक्षर--देवनागरी ।
    सुरक्षित स्थान—अभय जैन भण्डार (बीकानेर) । पुष्पिका
    नहीं है ।
    आरम्भ—गउरि का नन्दन त्रिभुवन सार । नाव भेसइ
    धारइ उदर भण्डार । एक दन्तो सुपिक सजलदछई । मूंसाको
    वाहण तिळक सिंदूर । कर ज्योडी नरपति भणै । उयाण करि
    रोहणी जिम तप्पी सूर ।
    अन्त—दरिण मरण सम्मन्यो जगंनाथ । आइ पउतली
    त्रिभुवन नाथ । सण धक गदाधरी । माँसि हे दिश्ण की मनह
    विचारि । हेतूं विवरण पाइउये । स्वामी पूरब देस की जवनम
    निवार । ३८ । पूरव देस को कव कुंछोक । पान फू......।
    [ गुप्त : पं० समूह नं० ८, संकेत 'मा' ] [ १९ ] नाम—बीसल देव रासो । कागज—देशी
    ( हाथ का बन(हुआ) । पन्ने—ग्यारह दोनों तरफ लिखे हुए ।
    आकार—१०३/८ इं० × ५३/८ इं० । पंक्तियां—सत्रह प्रत्येक
    पृष्ठ पर । छन्द संख्या—४० तथा एक अपूर्ण । प्रकार—
    पुराना । अपूर्ण । साधारणतया ठीक । अक्षर—देवनागरी ।
    सुरक्षित स्थान—अभय जैन मण्डार (बीकानेर) पुष्पिका
    नहीं है ।
    आरम्भ—गवरिका नन्दन त्रिभुवन सार । नाव भेसइ
    धारइ उदरि भंडार । एक दंतउ सुपिक सजलछह । मूसका
    वाहन सिळक सिन्दूर । कर जोडी नरपति भणइ । बाण करि
    रोहिणी स्युं तपइ सूर ॥१॥