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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,063 pages

About this granth

The Atharvaveda (अथर्ववेद) is one of the four Vedas. Besides ritual hymns it contains many verses concerned with everyday life: protection from disease, healing plants, the welfare of house and family, defence against enemies, marriage, kingship and praise of the earth, including the well-known Prithvi Sukta.

The introduction to this edition notes that Patanjali, author of the Mahabhashya, knew nine branches of the Atharvaveda, of which only a few, such as the Paippalada and Shaunaka, survive. The translation follows the Shaunaka recension, which the introduction describes as having 20 kandas, 731 suktas and 5,987 mantras. Each sukta is headed by its deity, for example the waters, Brihaspati, the rivers, plants, Brahmanaspati, the jangida amulet, Indra, the apamarga herb, and the house and its guardian, so the subject of each hymn is clear at a glance.

The Sanskrit mantras are accompanied by a simple Hindi rendering by Dr. Ganga Sahay Sharma. This is the 2015 edition of Sanskrit Sahitya Prakashan, New Delhi, part of its set of the four Vedas, and runs to 1063 pages.

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७. अदिति की स्तुति १-२
८. अदिति के पुत्रों अर्थात देवों का वर्णन १
९. बृहस्पति की स्तुति १
१०. सब के पोषक सूर्य देव की स्तुति १-४
११. सरस्वती की स्तुति १
१२. पर्जन्य देव की स्तुति १
१३. प्रजापति की दोनों पुत्रियों,
सभा तथा सभासदों की स्तुति १-४
१४. द्वेष करने वाले पुरुषों के तेज का विनाश १-२
१५. सविता देव की स्तुति १-४
१६. सब के प्रेरक सविता देव की स्तुति १
१७. बृहस्पति एवं सविता देव की स्तुति १
१८. धाता देव की स्तुति १-४
सविता व प्रजापति की स्तुति ४
१९. धाता की प्रशंसा १-२
२०. प्रजापति और धाता की स्तुति १
२१. अनुमति नामक देवी की प्रशंसा १-६
सुख प्राप्त करने का अनुग्रह ३
सुप्रणीति देवी से यज्ञ पूर्ण करने का आग्रह ४
२२. पुरातन सूर्य की प्रशंसा १
२३. सत्कर्म की प्रेरणा देने के लिए सूर्य देव की स्तुति १-२
२४. दुःस्वप्न विनाश की कामना १
२५. सविता व प्रजापति देव की आराधना १
२६. विष्णु और वरुण की प्रशंसा १-२
२७. विष्णु के वीरतापूर्ण कर्मों का वर्णन १-८
२८. इडा की स्तुति १
२९. काम में आने वाले उपकरणों की प्रशंसा १
३०. अग्नि और विष्णु की स्तुति १-२
३१. देवों से यज्ञ के यूपों को रंगने की कामना १
३२. धनवान एवं शौर्य संपन्न इंद्र की प्रशंसा १
३३. अग्नि देव की स्तुति १
३४. मरुत् आदि देवगणों से सुखसमृद्धि की कामना १
३५. अग्नि देव व अदीना देवमाता की प्रशंसा १
३६. अग्नि से शत्रुओं के विनाश की कामना १-३
विद्वेष करने वाली स्त्री २
संतान रहित नारी ३
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३७. पत्नी तथा पति का परस्पर अनुरक्त होना १
३८. मंत्र से युक्त वस्त्र १
३९. सौवर्चा नामक जड़ी का वर्णन १-५
पति वशीकरण २
शंखपुष्पी ३
४०. सारस्वत देव की प्रशंसा १
४१. सरस्वन् देवी की स्तुति १-२
४२. सूर्य और इंद्र की स्तुति १-२
४३. अमीवा नामक रोग के लिए सोम
एवं रुद्र देव की प्रार्थना १-२
४४. वाणियों के रूप १
४५. इंद्र और विष्णु की आराधना १
४६. सक्तुमंथ नामक जड़ीबूटी का वर्णन १
४७. ईर्ष्या को शांत करने के लिए आग्रह १
४८. सिनीवाली की प्रशंसा १-३
४९. कुहू की प्रशंसा १-२
५०. शोभित व शोभन स्तुति वाली पूर्णिमा का आह्वान १-२
५१. सुख के लिए देव पत्नियों की स्तुति १-२
५२. अग्नि की स्तुति १-९
जुआरियों का वध १
जुआरियों को जीतने के लिए इंद्र से प्रार्थना ४
इंद्र की प्रशंसा ७
विजय के लिए पासों की पूजा ९
५३. शत्रु से रक्षा के लिए बृहस्पति व इंद्र की प्रशंसा १
५४. आपस में सौमनस्य के लिए
अश्विनीकुमारों की आराधना १-२
५५. बृहस्पति, अग्नि और अश्विनी कुमारों की स्तुति १-७
प्राण और अपान वायु २
आयु की कामना ३
स्वर्ग में आरोहण ७
५६. इंद्र से सुख की कामना १
५७. ऋग्वेद और सामवेद का पूजन १-२
५८. मधु नामक जड़ीबूटी का वर्णन १-८
सर्प का विष निकालना २
शर्कोटक सर्प के टुकड़े ५
परपीडादायक बिच्छू ६
विषनाशक जड़ीबूटी ७
५९. सरस्वती की स्तुति १-२
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६०. सोमरस की प्रार्थना १-२
सोमरस पीने के लिए इंद्र और वरुण का आह्वान २
६१. निंदा करने वाले शत्रु का विनाश १
६२. घरों की स्तुति १-७
घरों में सौमनस्य ३
घर धनधान्य से परिपूर्ण हों ४
घरों में गाएं, बकरियां व भेड़ें हों ५
६३. तप के लिए अग्नि देव की स्तुति १-२
६४. प्रजा को वश में करने की कामना १
६५. अग्नि की स्तुति १
६६. अभिमंत्रित जल द्वारा कौवे के पंखों
की चोट से रक्षा १-२
मृत्यु देवता की आराधना २
६७. अपामार्ग की स्तुति १-३
पाप का निवारण ३
६८. वेदाध्ययन का फल १
६९. इंद्रियों की शक्ति की कामना १
७०. सरस्वती देवी की प्रशंसा १-२
७१. सरस्वती देवी की प्रशंसा १
७२. सुख की कामना १
७३. निर्ऋति देवी की स्तुति १-५
अजिर और अधिराज ३
७४. अग्नि की स्तुति १
७५. इंद्र के लिए हवि का पकाया जाना १-२
हवि के लिए इंद्र का आह्वान २
७६. दूध के रूप में हवि १
७७. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-११
गोशाला ४
सविता देव व उषा ६
गाय का आह्वान ७
अग्नि की स्तुति ९
अग्नि की स्तुति १०
धर्मदुघा धेनु ११
७८. गंडमालाओं का वर्णन १-४
क्रोध का विनाश ३
जातवेद अग्नि ४
७९. गायों की स्तुति १-२
गोशाला ३
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८०. मंत्र और ओषधि के प्रयोग १-४
क्षय रोग का वर्णन ४
८१. क्षय रोग १-२
सोमरस ३
८२. मरुतों की स्तुति १-३
८३. अग्नि की स्तुति १-२
८४. अमावस्या का वर्णन और स्तुति १-४
अन्न और धन ३
८५. पूर्णमासी की स्तुति १-४
पूर्णमास यज्ञ २
प्रजापति की प्रशंसा ३
८६. सूर्य और चंद्र का वर्णन १-६
सोम ३
चंद्रकलाओं का वर्णन ४
८७. अग्नि की स्तुति १-६
८८. वरुण की स्तुति १-४
८९. अग्नि व इंद्र की स्तुति १-३
इंद्र की प्रशंसा २
९०. गरुड़ का आह्वान १
९१. इंद्र का आह्वान १
९२. अग्नि रूप इंद्र की प्रशंसा १
९३. सर्पविष का विनाश १
९४. अग्नि की स्तुति १-४
जल की स्तुति ३
९५. अग्नि व इंद्र की स्तुति १-३
९६. धन के स्वामी इंद्र की प्रशंसा १
९७. इंद्र की प्रशंसा १
९८. इंद्र की स्तुति १
९९. सोमरस १
१००. उच्छोचन व प्रशोचन नामक मृत्यु देव १-३
१०१. शत्रु और भेड़िया १
१०२. अग्नि की स्तुति १-८
इंद्र की आराधना २
यज्ञ ५
मार्ग को जानने वाला देव ७
१०३. इंद्र की स्तुति १
१०४. यज्ञ वेदी १
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१०५. बुरे स्वप्न का विनाश १
१०६. स्वप्न में खाया अन्न दिन में दिखाई न देना १
१०७. धरती, आकाश अंतरिक्ष और मृत्यु को नमस्कार १
१०८. राजा का आह्वान १
१०९. बृहस्पति देव की स्तुति १
११०. ब्रह्मचारी का वर्णन १
१११. अग्नि की स्तुति १
११२. सूर्य की स्तुति १
११३. अग्नि देव की स्तुति १-२
११४. अग्नि की स्तुति १-७
जुए की देवियां ३
गंधर्व ६
११५. अग्नि और इंद्र की प्रशंसा १-३
११६. वृषभ की प्रशंसा १
११७. द्यावा पृथ्वी की स्तुति १-२
पाप से छुटकारा ३
११८. वाणापर्ण्य जड़ीबूटी का वर्णन १-२
११९. अग्नि की स्तुति १-२
मानसिक व्याधि २
१२०. सविता देव की स्तुति १-४
दरिद्रता २
अग्नि देव की प्रशंसा ३
पुण्य और पापकारिणी लक्ष्मियां ४
१२१. उष्णि्क ज्वर से संबंधित देव की प्रशंसा १-२
१२२. इंद्र की स्तुति १
१२३. सोम व वरुण की स्तुति १
आठवां कांड
सूक्त विषय मंत्र
१. मृत्यु देव की स्तुति १-२१
पाप देवता के बंधनों से उद्धार ३
मृत्यु से छुटकारा ६
अंधकार से प्रकाश की ओर ८
वाडव आदि अग्नियों द्वारा रक्षा ११
मृत्यु से छीनने वाले इंद्र, धाता एवं सविता १५
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अदिति पुत्र देव मृत्यु से छुड़ाएं १६
द्यौ देवता एवं पृथ्वी १७
बाहरी और आंतरिक रोगों का विनाश २१
२. आयु की कामना १-२८
निंदा से मुक्ति ३
पुरुष की चिकित्सा ५
ग्वारपाठा नामक जड़ीबूटी ६
भव और शर्व की स्तुति ७
रुद्र आदि देव ९
अग्नि से प्राणों की याचना १३
सविता देव की प्रशंसा १७
बालक की रक्षा २०
शांति २६
३. अग्नि देव की स्तुति १-२६
४. इंद्र और सोम की स्तुति १-२५
सोम देव द्वारा पापी राक्षस का वध १३
मरुतों की प्रशंसा १८
५. तिलक वृक्ष से निर्मित मणि का वर्णन १-२२
कृत्या राक्षसी से बचाव ७
तिलक वृक्ष की स्तुति ११
मणि की महिमा १३
इंद्र का वर्णन १७
६. दुर्नाम और सुनाम नामक रोगों और
उनके निवारण का वर्णन १-२६
पीली सरसों रूपी ओषधि ६
ककुंभ पिशाचों का नाश ११
गर्भ की रक्षा १८
७. आयुष्य ओषधियों का वर्णन १-२८
वृक्षों का गर्भ पीपल २०
८. इंद्र की स्तुति १-२४
पीपल और खैर के वृक्ष ३
इंद्र से शत्रु वध का आग्रह ६
सूर्य की प्रशंसा ७
मृत्युदूतों से शत्रुवध का आग्रह ११
अग्नि का वर्णन २३
९. विराट के दोनों वत्सों का वर्णन १-२६
विराट का वर्णन ११
सूर्य, चंद्र एवं अग्नि का वर्णन १३
छः मास १७
सात होम १८
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१०. (१) विराट् का वर्णन १-१३
१०. (२) विराट् का वर्णन १-१०
१०. (३) विराट् का वर्णन १-८
१०. (४) विराट् का वर्णन १-१६
१०. (५) विराट् का वर्णन १-१६
१०. (६) विराट् का वर्णन १-४
नौवां कांड
सूक्त विषय मंत्र
१. मधुकशा गौ की स्तुति व वर्णन १-२४
सोमरस १३
अग्नि की स्तुति १५
अश्विनीकुमारों की स्तुति १७
२. वृषभ रूपी काम की स्तुति १-२५
काम देव से दरिद्रता दूर करने की प्रार्थना ४
काम देव की स्तुति १०
अग्नि, इंद्र और सोम १३
काम देव की स्तुति २५
३. शालाओं का वर्णन १-३१
शाला की पूर्व दिशा को नमस्कार २५
४. शक्तिशाली ऋषभ का वर्णन १-२४
जड़ीबूटियों के रस का परिचय ५
बैल का दान १८
५. अज का वर्णन १-३८
अज ही अग्नि है और अज ही ज्योति है ७
अग्नि की प्रशंसा १७
पंचौदन ३१
६. अतिथि सत्कार का वर्णन १-१७
७. अतिथि सत्कार का वर्णन १-१३
८. अतिथि सत्कार का वर्णन १-९
९. अतिथि सत्कार का वर्णन १-१०
१०. अतिथि सत्कार का वर्णन १-१०
११. अतिथि सत्कार का वर्णन १-१४
१२. गो महिमा वर्णन १-२६
१३. सर्वशीर्षामय दूरीकरण तथा सभी
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ㅤㅤㅤरोगों का दूरीकरणㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-२२
१४.ㅤसूर्य की स्तुतिㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-२२
ㅤㅤㅤपाँच अरों वाला पहियाㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ११
ㅤㅤㅤबारह आकृतियांㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१२
ㅤㅤㅤबारह अरों वाला पहियाㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१३
१५.ㅤगायत्र का वर्णनㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-२८
ㅤㅤㅤगायत्र यज्ञ की तीन समिधाएंㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ३
ㅤㅤㅤभूमि की पूजाㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ२०
ㅤㅤㅤमित्र और वरुण का रूपㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ२३
ㅤㅤㅤतीन ज्योतियांㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ२६
ㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤदसवां कांड
सूक्तㅤविषयㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤमंत्र
१.ㅤㅤकृत्या का परित्यागㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-३२
२.ㅤㅤमनुष्य के शरीर का निर्माणㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-३३
ㅤㅤㅤदेवों की नगरी का वर्णनㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ३१
३.ㅤㅤवरणमणि का वर्णनㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-२५
ㅤㅤㅤसमस्त रोगों की ओषधिㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ३
ㅤㅤㅤसोमपीथ और मधुपर्क यज्ञㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ२१
४.ㅤㅤदेवों के रथों का वर्णनㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-२६
ㅤㅤㅤश्वेत पद द्वारा सर्पों का विनाशㅤㅤㅤㅤㅤㅤ३
ㅤㅤㅤइंद्र की प्रशंसाㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१७
५.ㅤㅤजल की स्तुति तथा वर्णनㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-५०
ㅤㅤㅤसप्तऋषियों का अनुवर्तनㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ३९
ㅤㅤㅤदिव्यजनों और अग्नि देव से प्रार्थनाㅤㅤㅤㅤ४६
६.ㅤㅤवनस्पतिफला मणि का वर्णनㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-३५
ㅤㅤㅤअग्नि का आह्वानㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ३५
७.ㅤㅤअंगों की महत्ता का बखानㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-४४
ㅤㅤㅤवह जगदाधार कौन हैㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ४
ㅤㅤㅤश्रेष्ठ परमात्मा को नमस्कारㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ३६
८.ㅤㅤब्रह्म की स्तुतिㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-४४
ㅤㅤㅤबारह अरे तथा तीन नेमियांㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ४
ㅤㅤㅤपरमात्मा संसार के मध्य स्थित हैㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१५
ㅤㅤㅤआत्म तत्त्व एक हैㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ२५
९.ㅤㅤशतौदना गो का वर्णन व स्तुतिㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-२७
१०.ㅤवशा गौ का वर्णन व स्तुतिㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-३४
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ग्यारहवां कांड
सूक्त विषय मंत्र
१. अग्नि देव की स्तुति १-३७
ब्रह्मौदनासव यज्ञ २०
सोमरूपी ब्रह्मौदन २६
२. भव और शर्व की स्तुति १-३१
पशुपति को नमस्कार ६
अतिशय बलशाली रुद्र की स्तुति १०
रुद्र के आयुध २२
३. बृहस्पति का भोजन १-३१
ओदन की महिमा जानने वाला प्रसिद्ध गुरु २३
४. ओदन का खाया जाना १-६
५. ओदन की स्थिति १-१८
६. प्राण के लिए नमस्कार १-२६
प्राण अर्थात सूर्य देव ३
७. ब्रह्मचारी की महिमा का वर्णन १-२६
ब्रह्मचारी की पहली समिधा ४
ब्रह्मचारी पहली भिक्षा ९
८. अग्नि, वनस्पति, जड़ीबूटी और
फसलों की स्तुति १-२३
सभी देवों की स्तुति २
इंद्र तथा मातलि की प्रशंसा २३
९. हवन से बचा भात १-२७
यज्ञ शेष की प्रशंसा ११
नौ खंडों वाली पृथ्वी १४
१०. सृष्टि की रचना १-३४
प्रलय काल के महासागर में तप और कर्म ६
इंद्र, अग्नि, सोम, त्वष्टा की उत्पत्ति ८
ज्ञानेंद्रियां तथा कर्मेंद्रियां १३
परमेश्वर और माया १७
११. अर्बुदि सर्प की स्तुति १-२६
१२. युद्ध के लिए तैयार होने की प्रेरणा १-२७
जातवेद अग्नि और आदित्य की स्तुति ४
श्वेत चरणों वाली गाय ६
ब्रह्मणस्पति देव से विजय प्रदान करने का अनुरोध ९
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बारहवां कांड
सूक्त विषय मंत्र
१. पृथ्वी की स्तुति व वर्णन १-६३
धरातल की विशेषता २
पृथ्वी का निर्माण १०
२. कुंताप अग्नि को दूर करना १-५५
शव भक्षक अग्नि १२
गार्हपत्य अग्नि की स्तुति १८
३. अग्नि की स्तुति १-६०
ओदन का प्रभाव ३
पृथ्वी की स्तुति १२
वनस्पति की प्रशंसा १८
४. गोदान का वर्णन १-५३
वशा गौ का वर्णन ३
नारद की स्तुति ४५
५. ब्रह्मगवी का वर्णन १-६
६. ब्रह्मगवी का वर्णन १-५
७. ब्रह्मगवी का वर्णन १-१६
८. ब्रह्मगवी का वर्णन १-११
९. ब्रह्मगवी का वर्णन १-८
१०. ब्रह्मगवी का वर्णन १-१५
११. ब्रह्मगवी का वर्णन १-१२
तेरहवां कांड
सूक्त विषय मंत्र
१. सूर्य देव की स्तुति १-६०
अग्नि की स्तुति १५
वाचस्पति की प्रशंसा १७
यज्ञ की वृद्धि ६०
२. सूर्य देव की स्तुति १-४६
रोहित देव का वर्णन और प्रशंसा ४१
३. रोहित देव की स्तुति १-२६
४. सूर्य की स्तुति १-१३
५. एक वृत्त अर्थात् ब्रह्म के ज्ञाता १-७
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६. ब्रह्म के ज्ञाता का वर्णन १-७
७. ब्रह्म के ज्ञाता का वर्णन १-१७
८. इंद्र की स्तुति १-६
९. ब्रह्म वर्चस प्रदान करने की कामना १-५
चौदहवां कांड
सूक्त विषय मंत्र
१. सोम की स्तुति १-६४
अश्विनीकुमारों की प्रशंसा १४
इंद्र की प्रशंसा १८
चंद्र का वर्णन २४
गायों की स्तुति ३२
बृहस्पति, इंद्र और सविता देव की प्रशंसा ६२
२. अग्नि देव की स्तुति १-७५
सरस्वती की प्रशंसा १५
स्त्री के लिए सुखकारी उपदेश २६
वंशवृद्धि ३१
बृहस्पति देव का वर्णन ५३
पति और पत्नी का प्रेम ६४
सविता देव से दीर्घजीवन की कामना ७५
पंद्रहवां कांड
सूक्त विषय मंत्र
१. समूहों का हित करने वाले समूह पति का वर्णन १-८
२. व्रात्य का वर्णन १-२८
शरीर रूपी रथ का वर्णन ७
३. व्रात्य का वर्णन १-११
आसंदी और बैठने की चौकी २
ऋग्वेद के मंत्र और यजुर्वेद के मंत्र
आसंदी बुनने के तंतु ६
४. व्रात्य का वर्णन १-१८
ऋतुओं के रक्षक ४
५. भव अर्थात् महादेव का वर्णन १-१६
रुद्र ध्रुव दिशा के रक्षक १२
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६. व्रात्य का वर्णन १-२६
पृथ्वी, अग्नि, वनस्पति और ओषधियां २
साम, यजु, और ब्रह्म ८
७. व्रात्य का वर्णन १-५
८. व्रात्य का वर्णन १-३
९. व्रात्य का वर्णन १-३
१०. ज्ञानी व्रात्य का वर्णन १-११
ब्रह्मबल और क्षात्रबल ४
आकाश और पृथ्वी ६
११. व्रात्य की स्तुति और वर्णन १-११
१२. व्रात्य की स्तुति और वर्णन १-११
विद्वान व्रतधारी की आज्ञा से हवन ४
१३. व्रात्य की स्तुति और वर्णन १-१४
व्रात्य अतिथि के रूप में ५
१४. व्रात्य की स्तुति तथा वर्णन १-२४
१५. व्रात्य की स्तुति तथा वर्णन १-९
१६. व्रात्य का वर्णन १-७
१७. व्रात्य का वर्णन १-१०
१८. व्रात्य का वर्णन १-५
सोलहवां कांड
सूक्त विषय मंत्र
१. जल की स्तुति और वर्णन १-१३
जल के श्रेष्ठ भाग को सागर की
ओर प्रेरित करना ६
२. प्रजापति से प्रार्थना १-६
३. आदित्य का वर्णन १-६
४. आदित्य का वर्णन १-७
५. स्वप्न की उत्पत्ति १-१०
स्वप्न मृत्यु है २
स्वप्न निर्धनता का पुत्र ६
६. दुःस्वप्न का नाश १-११
७. दुःस्वप्न का नाश १-१३
८. बुरे स्वप्न का नाश १-३३
शत्रु बृहस्पति के बंधन से मुक्त न हो १०
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शत्रुओं का वध करके लाए हुए पदार्थ हमारे १६
मृत्यु के पाश ३२
९. प्रजापति देव की स्तुति १-४
सत्रहवां कांड
सूक्त विषय मंत्र
१. इंद्र रूप सूर्य की स्तुति १-३०
सूर्य की शक्तियां अनेक हैं ८
परम ऐश्वर्य वाले सूर्य का वर्णन १३
सूर्य देव सब के कल्याणकारी २६
अठारहवां कांड
सूक्त विषय मंत्र
१. यमयमी संवाद एवं अग्नि आदि देवों की स्तुति १-६१
भाई और बहन पर आक्षेप १२
देवों ने जल, वायु और ओषधि तत्त्व को
पृथ्वी पर स्थापित किया १७
सौमाग्नि के सिद्ध होने पर अग्निष्टोम आदि कर्म २१
अग्नि की प्रशंसा २२
आकाश तथा पृथ्वी मुख्य तथा सत्यवाणी हैं २९
मित्र एवं वरुण देवता से प्रार्थना ३९
पितरों द्वारा सरस्वती का आह्वान ४१
दाह संस्कार ६१
२. यम आदि की स्तुति १-६०
जातवेद अग्नि की स्तुति ५
प्रेत का वर्णन ७
कुत्ते यमपुर के रक्षक १२
अनंत द्रष्टा ऋषि १८
सूर्य के पुत्र यम ३२
यम का वचन ३७
श्मशान भूमि ३८
मृतक का श्राद्ध ५०
३. यम की स्तुति १-७३
काई और बेंत में जल का सार ५
अग्नियों का वर्णन ६
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प्रेत का वर्णन ७
पितृ याग नामक कर्म १४
महर्षियों से सुख की कामना १६
देवमाता अदिति की प्रशंसा २७
भू देवता की प्रशंसा ५०
शीतकारिणी जड़ीबूटियां और मंडूकपर्णी
ओषधि से व्याप्त पृथ्वी ६०
वनस्पति में अस्थिरूप पुरुष ढांचा ७०
४. अग्नि की स्तुति १-८९
अग्नि, वायु और सूर्य का स्वर्ग में निवास ४
प्रेत का संस्कार १६
वैश्वानर अग्नि द्वारा पितरों का पोषण ३५
दाह संस्कार करने वाले पुरुषों द्वारा
सरस्वती का आह्वान ४५
सोमरस प्राप्त करने वाले अधिकारी पितर ६३
अग्नि, पितरों और यम के लिए नमस्कार ७२
प्रकाशमान अग्नि की स्तुति ८८
उन्नीसवां कांड
सूक्त विषय मंत्र
१. देवों के उद्देश्य से यज्ञ में आहुति १-३
आहुतियों से यज्ञ की रक्षा की कामना २
२. कल्याणकारी जलों का वर्णन १-५
जलों की वंदना ३
३. अग्नि देव की स्तुति १-४
अग्नि हर वस्तु में विद्यमान है २
अग्नि की महिमा ३
४. अग्नि की स्तुति १-४
सरस्वती की कामना २
बृहस्पति का आह्वान ३
५. देवताओं के स्वामी इंद्र की स्तुति १
६. नारायण नाम के पुरुष की स्तुति १-१६
यज्ञ पुरुष की कल्पना ५
ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र की उत्पत्ति ६
चंद्रमा और सूर्य की उत्पत्ति ७
अंतरिक्षलोक, स्वर्गलोक,
भूमि और दिशाओं की उत्पत्ति ८
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विराट की उत्पत्ति ९
घोड़ों आदि की उत्पत्ति १२
अश्वमेध यज्ञ १५
७. नक्षत्रों की स्तुति १-५
विभिन्न नक्षत्रों के अनुकूल होने की कामना २
८. नक्षत्रों की स्तुति १-७
अट्ठाईस नक्षत्र २
नक्षत्रों के देवताओं का अभिनंदन ३
इंद्र की स्तुति ६
९. देवों की स्तुति १-१४
ज्ञानेंद्रियों का वर्णन ५
शांति की कामना ९
१०. इंद्र और अग्नि की स्तुति १-१०
सभी देवों से सुख की याचना ४
सोम ७
११. सत्य पालक देवों और पितरों की स्तुति १-६
१२. उषा की प्रशंसा १
१३. इंद्र की प्रशंसा १-११
इंद्र की सहायता से शत्रु विजय की कामना ३
शत्रु को नष्ट करने वाले बृहस्पति ८
१४. द्यावा और पृथ्वी की स्तुति १
१५. अभय करने वाले इंद्र आदि की प्रशंसा १-६
कर्मों की सिद्धि हेतु इंद्र से प्रार्थना ३
१६. सविता देव की स्तुति १-२
अश्विनीकुमारों की स्तुति ३
१७. पृथ्वी की स्तुति १-१०
अंतरिक्ष का स्थायी देवता २
सोम व रुद्र की स्तुति ३
१८. शत्रुओं के विनाश की कामना १-१०
वायु से शत्रु विनाश की कामना २
१९. मित्र नाम वाले अग्नि आदि देवों की स्तुति १-११
वायु द्वारा पुर की रक्षा ३
२०. इंद्र, अग्नि, सविता आदि देवों की स्तुति १-४
सभी प्राणियों के पालनकर्ता प्रजापति ३
२१. छंदों के लिए आहुति १
२२. अंगिरा गोत्र वाले ऋषियों के लिए आहुति १-२१
छठे के लिए आहुति २
२३. ऋषियों के लिए आहुति १-३०
पांच ऋचाओं की रचना करने करने
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वाले ऋषियों को आहुति २
ब्रह्मा का वर्णन ३०
२४. शत्रु विनाशकर्ता ब्रह्मणस्पति की स्तुति १-८
इंद्र की स्तुति २
देवों से प्रार्थना ४
२५. शक्तिशाली अश्व की कामना १
२६. अग्नि से उत्पन्न स्वर्ण को धारण करने
वाले पुरुष का वर्णन १-४
२७. विवृत नामक मणि का वर्णन १-१५
सोम आदि देवों की स्तुति ३
मणिधारक पुरुष ८
आदित्य नाम के देव की प्रशंसा ११
२८. दर्भमणि का वर्णन व स्तुति १-१०
द्वेष करने वालों के विनाश के लिए प्रार्थना २
२९. दर्भमणि की स्तुति तथा वर्णन १-९
सेना एकत्र करने वालों के नाश की कामना २
३०. दर्भमणि की स्तुति १-५
दर्भमणि की गांठों में सुरक्षा कवच २
३१. औदुंबरमणि की स्तुति १-१४
पुरुषों, पशुओं, अन्न तथा ओषधियों
की अधिकता की कामना ४
सरस्वती देवी की स्तुति १०
३२. उग्र ओषधि दर्भ का वर्णन १-१०
३३. सौ गांठों वाली दर्भ ओषधि की स्तुति १-५
दर्भ नाम का रक्षा साधन शक्ति संपन्न ४
३४. जंगिड़ नामक जड़ीबूटी का वर्णन १-१०
जंगिड़ मणि की महिमा २
३५. महा रोग नाशक जंगिड़ मणि का वर्णन १-५
३६. राजयक्ष्मा अर्थात् टीबी रोग नाशक शतवार
ओषधि का वर्णन १-६
पागलपन व अन्यरोगों का निवारण ६
३७. अग्नि की स्तुति १-४
प्रसन्नता के लिए यज्ञ ४
३८. गुग्गुलु नाम की ओषधि का वर्णन १-३
३९. कूठ नामक विशेष ओषधि का वर्णन १-१०
स्वर्ग में देवों का घर पीपल वृक्ष ६
४०. दोषों को दूर करने के लिए बृहस्पति की स्तुति १-४
जल देवता की प्रशंसा २
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द्यावा पृथ्‍वी की प्रशंसा ३
अश्विनीकुमारों की प्रशंसा ४
४१. तप की दीक्षा १
४२. ब्रह्म का वर्णन १-४
इंद्र की प्रशंसा ३
४३. अग्नि आदि देवों की स्तुति १-८
सगुण ब्रह्म का स्वरूप जानने वाले कहां जाते हैं २
४४. आंजन का वर्णन तथा स्तुति १-१०
प्राण रक्षक आंजन ४
राजा वरुण की स्तुति ८
४५. आंजन का वर्णन और स्तुति १-१०
अग्नि की स्तुति ६
इंद्र की प्रशंसा ७
भगदेव की स्तुति ९
४६. आस्तृत मणि का वर्णन तथा स्तुति १-७
४७. नीलवर्ण के अंधकार वाली रात्रि का वर्णन १-९
कल्याण कारिणी रात्रि २
रात्रि के गण देवता ४
४८. रात्रि का वर्णन तथा प्रशंसा १-६
उषःकाल की कामना ३
४९. रात्रि का वर्णन व स्तुति १-१०
५०. रात्रि का वर्णन व वंदना १-७
५१. कर्म का अनुष्ठान करने का इच्छुक १-२
५२. काम की स्तुति १-५
काम से मित्र के समान आचरण करने की इच्छा २
५३. काल का वर्णन १-१०
काल रूप परमात्मा २
सूर्य का संसार को प्रकाशित करना ६
५४. काल का वर्णन १-५
सभी की गति का कारण काल २
५५. अग्नि देव की स्तुति १-६
संपूर्ण अन्न और जीवन की कामना ६
५६. बुरे स्वप्न के अभिमानी क्रूर पिशाच का वर्णन १-६
स्वप्न से बचने का उपाय वरुण ने
आदित्यों को बताया ४
५७. दुःस्वप्न नाशन १-५
५८. परमात्मा से संबंधित ज्ञान १-६
आकाश और पृथ्वी से तेज की याचना ३
इंद्रियों को निर्देश ४
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५९. अग्नि की स्तुति १-३
६०. शारीरिक स्वास्थ्य की कामना १-२
६१. अग्नि की स्तुति १
६२. अग्नि की स्तुति १
६३. ब्रह्मणस्पति की स्तुति १
६४. जातवेद अग्नि की स्तुति १-४
६५. सूर्य की प्रशंसा १
६६. जातवेद सूर्य की वंदना १
६७. सूर्य देव की स्तुति १-८
६८. व्यान और प्राण वायु के मूल आधार का विस्तार १
६९. इंद्र आदि देवगण की स्तुति १-४
७०. इंद्र की स्तुति १
७१. सावित्री देवी की स्तुति १
७२. देवों से मनचाहे कर्म के फल की याचना १
बीसवां कांड
सूक्त विषय मंत्र
१. इंद्र से सोम पीने का अनुरोध १-३
वेद मंत्रों द्वारा अग्नि देव की स्तुति ३
२. अग्नि, मरुत एवं इंद्र देव की स्तुति १-४
द्रविणोदा से सोमपान करने का अनुरोध ४
३. इंद्र की स्तुति १-३
४. इंद्र से सोमरस पीने का अनुरोध १-३
५. इंद्र से सोम प्राप्त करने का अनुरोध १-७
इंद्र से यज्ञ में आने का आग्रह ७
६. कामनाओं की वर्षा करने वाले इंद्र से मधुर
सोम पान करने का आग्रह १-९
मरुतों के स्वामी इंद्र की स्तुति ३
७. इंद्र की स्तुति १-४
८. इंद्र से सोम पीने का आग्रह १-३
९. दर्शनीय और दुःख विनाशक इंद्र की स्तुति १-४
उत्तम अन्न की याचना ३
१०. इंद्र की स्तुति १-२
११. इंद्र के कार्यों का वर्णन १-११
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इंद्र स्वर्ग प्राप्त कराने शत्रुओं
का विनाश करने वाले हैं ४
स्तुति कर्ताओं को धन देने वाले इंद्र ७
इंद्र द्वारा वनस्पतियों एवं दिवसों की रचना १०
१२. इंद्र की स्तुति १-७
१३. बृहस्पति देव और इंद्र से यज्ञशाला
में आने के लिए आग्रह १-४
अग्नि से यज्ञ में आने का आग्रह ४
१४. रक्षा की कामना से इंद्र का आह्वान १-४
१५. इंद्र की स्तुति १-६
इंद्र के यज्ञ का स्थान सारा जगत् ३
१६. बृहस्पति देव की प्रशंसा १-१२
बृहस्पति ने छिपी हुई गाएं बाहर निकालीं ४
१७. इंद्र की स्तुति १-१२
इंद्र से सोमरस पीने का आग्रह ३
बृहस्पति देव की प्रशंसा ११
१८. वज्रधारी इंद्र की स्तुति १-६
१९. इंद्र की स्तुति १-७
२०. इंद्र की स्तुति १-७
पांच वर्णों में व्याप्त बल की कामना २
२१. इंद्र की स्तुति १-११
२२. वर्षा करने वाले इंद्र की प्रशंसा १-६
२३. इंद्र से यज्ञ में आने का आग्रह १-९
२४. इंद्र की स्तुति १-९
इंद्र को सोम पान के लिए बुलावा ४
धनों के विजेता इंद्र ६
२५. इंद्र की महिमा का गान १-७
अविनाशी इंद्र का पूजन ५
२६. इंद्र की स्तुति १-६
अज्ञानी को ज्ञान देने वाले सूर्य का उदय ६
२७. इंद्र की स्तुति १-६
२८. इंद्र के कार्यों का वर्णन १-४
२९. इंद्र की स्तुति तथा वर्णन १-५
३०. इंद्र के अश्वों का वर्णन १-५
इंद्र के सुंदर शरीर व शस्त्रों का वर्णन ३
इंद्र के केश ५
३१. अश्वों द्वारा इंद्र को यज्ञ में लाया जाना १-५
इंद्र का निवास ५
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३२. इंद्र की महिमा १-३
३३. इंद्र के लिए सोम रस का संस्कार १-३
३४. इंद्र के बल की महिमा १-१८
शंबर असुर का वध ११
३५. इंद्र की स्तुति १-१६
महान् इंद्र के असाधारण कर्म का वर्णन ७
३६. इंद्र की स्तुति १-११
धन की याचना ३
३७. इंद्र की स्तुति का वर्णन १-११
इंद्र का वज्र ३
३८. इंद्र से सोम रस पीने का आग्रह १-६
इंद्र का पूजन ४
३९. इंद्र का आह्वान १-५
४०. इंद्र की महिमा का गुणगान १-३
४१. बलशाली इंद्र का वर्णन १-३
४२. इंद्र की शक्ति १-३
४३. इंद्र से शत्रु विनाश की कामना १-३
४४. इंद्र की स्तुति १-३
४५. इंद्र को पास बुलाने का आग्रह १-३
४६. इंद्र की महिमा १-३
४७. इंद्र का वर्णन व स्तुति १-२१
इंद्र के रथ में घोड़ों को जोड़ना ११
४८. इंद्र की स्तुति १-६
सूर्य की किरणों के तीस मुहूर्त दीप्त ६
४९. इंद्र की स्तुति १-७
५०. इंद्र की महिमा का गुणगान १-२
५१. इंद्र के आयुधों का वर्णन १-४
५२. सोमरस १-३
५३. इंद्र से यज्ञ में आने का अनुरोध १-३
५४. इंद्र से यज्ञ में आने का अनुरोध १-३
५५. इंद्र को यज्ञ में बुलाने का संकल्प १-३
५६. इंद्र की स्तुति और वर्णन १-६
५७. रक्षा के लिए इंद्र का आह्वान १-१६
५८. इंद्र की महिमा की प्रशंसा १-४
५९. इंद्र की स्तुति १-४
इंद्र का यज्ञ भाग ३
६०. अन्न एवं धन के स्वामी इंद्र की प्रशंसा १-६
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