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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages
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६. अश्वत्थ मणि की स्तुति १-८
७. हिरण के सिर में सींग की रोग निवारक
ओषधि का वर्णन १-७
८. मित्र आदि देवों से आयु को दीर्घ करने का अनुरोध १-६
सविता, त्वष्टा, इंद्र आदि देवों की स्तुति २
सोम, सविता आदि देवताओं का आह्वान ३
९. पशुओं से सुरक्षा के लिए देवों से प्रार्थना १-६
१०. एकाष्टका उषा की स्तुति १-१३
११. इंद्र और अग्नि देव से यक्ष्मा रोग से
मुक्ति की प्रार्थना १-८
१२. शाला, वास्तोष्पति का वर्णन १-९
इंद्र और बृहस्पति से शाला के निर्माण का निवेदन ४
१३. सिंधु और जल का वर्णन १-७
१४. गायों का वंश बढ़ाने के लिए स्तुति १-६
१५. व्यापार से लाभ की कामना के लिए
इंद्र व अग्नि देव की स्तुति १-८
१६. अग्नि, इंद्र, मित्र, वरुण आदि की प्रशंसा १-७
१७. खेती बढ़ाने के लिए इंद्र, सूर्य, वायु
आदि देवों की प्रशंसा १-९
१८. पाठा जड़ीबूटी का वर्णन १-६
१९. पुरोहित द्वारा राजा की जय की कामना १-८
२०. अग्नि की स्तुति १-१०
२१. अग्नि की स्तुति १-१०
२२. इंद्र, वरुण आदि से बल की प्रार्थना १-६
२३. पुत्र प्राप्ति की कामना १-६
२४. वनस्पति की प्रशंसा १-७
२५. काम देव की प्रशंसा १-६
मित्र वरुण की स्तुति ६
२६. गंधर्वों की स्तुति १-६
२७. दिशाओं की स्तुति १-६
२८. जुड़वां बच्चों को जन्म देने वाली गाय का वर्णन १-६
२९. सफेद पैरों वाली भेड़ की महत्ता का वर्णन १-८
३०. सौमनस्य कर्म की विशेषताएं १-७
३१. अश्विनीकुमारों, इंद्र, वायु आदि की स्तुति १-११
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सूक्त विषय मंत्र

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चौथा कांड
सूक्त विषय मंत्र
१. बृहस्पति आदि देवों की स्तुति १-७
२. प्रजापति की प्रशंसा १-८
३. बाघ, चोरमनुष्य और भेड़िए से बचाव की कामना १-७
४. वनस्पति व जड़ीबूटियों का वर्णन १-८
५. स्वप्न के देव की प्रशंसा १-७
६. तक्षक की उत्पत्ति का वर्णन १-८
विष का वर्णन ३
७. विषहारी वारण वृक्ष का वर्णन १-७
विषमूलक जड़ीबूटी का वर्णन १-६
८. जल का वर्णन १-७
९. अंजन मणि की महिमा का वर्णन १-१०
१०. शंख मणि का वर्णन १-७
११. इंद्र के रूप में अनड्वान अर्थात् बैल का वर्णन १-१२
१२. रोहिणी वनस्पति का वर्णन १-७
१३. वायु और इंद्र की स्तुति १-७
१४. यज्ञ की महिमा १-९
१५. वर्षा देव की स्तुति १-१६
१६. वरुण देव की प्रशंसा १-९
१७. सहदेवी व अपामार्ग वनस्पति का वर्णन १-८
१८. सहदेवी व अपामार्ग जड़ी का वर्णन १-८
१९. सहदेवी व अपामार्ग ओषधि का वर्णन १-८
२०. सदा पुष्पा नाम की जड़ीबूटी का वर्णन १-९
२१. गायों की महिमा का वर्णन १-७
२२. इंद्र व क्षत्रिय राजा की स्तुति १-७
२३. अग्नि देव की स्तुति १-७
२४. इंद्र देव की स्तुति १-७
२५. वायु और सविता देव की स्तुति १-७
२६. द्यावा पृथ्वी की स्तुति १-७
२७. मरुत् की स्तुति १-७
२८. भव और शर्व की स्तुति १-७
२९. मित्र और वरुण देव की प्रशंसा १-७
३०. ब्रह्मवादिनी पुत्री वाक् का वर्णन १-८
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३१. क्रोध के अभिमानी देव मन्यु का वर्णन १-७
३२. मन्यु की स्तुति १-७
३३. अग्नि देव की स्तुति १-८
३४. ब्रह्मोदन की स्तुति १-८
३५. प्राणियों के निर्माणकर्ता देवों का वर्णन १-७
३६. सत्य एवं ओज वाले अग्नि देव की स्तुति १-१०
३७. विभिन्न जड़ीबूटियों का वर्णन १-१२
३८. अप्सराओं द्वारा अक्षशलाका की स्तुति १-७
३९. अग्नि, वायु, सूर्य आदि की प्रशंसा १-१०
४०. जातवेद अग्नि की स्तुति १-८
पांचवां कांड
सूक्त विषय मंत्र
१. वरुण की स्तुति १-९
२. इंद्र की महिमा का वर्णन १-९
३. अग्नि देव की प्रशंसा १-११
भारती, सरस्वती और पृथ्वी की स्तुति ७
इंद्र की स्तुति ८
४. कुष्ठ ओषधि का वर्णन १-१०
५. लाख ओषधि का वर्णन १-९
६. ब्रह्म की स्तुति १-१४
सूर्य की स्तुति ४
अग्नि की स्तुति ११
७. अराति की स्तुति १-१०
८. अग्नि देव से यज्ञ में सभी देवों को
लाने का आग्रह १-९
इंद्र को यज्ञ में आने का निमंत्रण २
अन्य देवों से यज्ञ में आने का आग्रह ३
इंद्र से शत्रुओं को मारने का आग्रह ९
९. पृथ्वी, स्वर्ग और आकाश से प्रार्थना १-८
१०. पत्थर से बने घर की स्तुति १-८
चंद्रमा, वायु, सूर्य, अंतरिक्ष और पृथ्वी की स्तुति ८
११. वरुण देव की स्तुति १-११
१२. अग्नि की स्तुति १-११
१३. सर्पविषनाशन वर्णन १-११

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१४. ओषधि से प्रार्थना १-१३
१५. मधुला ओषधि का वर्णन १-११
१६. लवण को संतानोत्पत्ति के लिए उत्साहित करना १-११
१७. ब्रह्मजाया का वर्णन १-१८
१८. ब्राह्मण की गाय का वर्णन १-१५
१९. ब्राह्मणों के साथ बुरे व्यवहार के फल का वर्णन १-१५
२०. दुंदुभि की महिमा का वर्णन १-१२
२१. दुंदुभि की महिमा का वर्णन १-१२
२२. देह को नष्ट कर देने वाले ज्वर का वर्णन १-१४
२३. इंद्र की स्तुति १-१३
२४. सविता, अग्नि, द्यावा और पृथ्वी, वरुण,
मित्र, वायु देव, चंद्रमा आदि की स्तुति १-१७
२५. अग्नि, वरुण, मित्र आदि की स्तुति १-१३
२६. अग्नि, सविता देव, इंद्र व अश्विनीकुमारों
की स्तुति १-१२
२७. अग्नि सभी देवों में श्रेष्ठ १-१२
२८. उषा देवी, आदित्य आदि का वर्णन १-१४
२९. जातवेद अग्नि देव की स्तुति १-१५
३०. यम, आयु और अग्नि से प्रार्थना १-१७
३१. कृत्या का प्रतिहरण १-१२
छठा कांड
सूक्त विषय मंत्र
१. सविता देव की स्तुति १-३
२. इंद्र के लिए सोमरस का प्रबंध १-३
३. इंद्र और पूषा देव की स्तुति १-३
४. त्वष्टा की स्तुति १-३
अदिति की स्तुति २
अश्विनीकुमारों की स्तुति ३
५. अग्नि और इंद्र की स्तुति १-३
६. ब्रह्मणस्पति व सोम की प्रशंसा १-३
७. सोम से कल्याण की याचना १-३
८. कामात्मा का वर्णन १-३
९. कामात्मा का वर्णन १-३
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१०. अग्नि और वायु की स्तुति १-३
११. पुंसवन कर्म का वर्णन १-३
१२. विष निवारण वर्णन १-३
१३. मृत्यु की स्तुति १-३
१४. श्लेष्मा रोग का निवारण १-३
१५. वनस्पतियों में उत्तम पलाश वृक्ष का वर्णन १-३
१६. खाई जाने वाली सरसों का वर्णन १-४
१७. नारी के गर्भ में स्थित रहने की कामना १-४
१८. ईर्ष्या विनाशन १-३
१९. देवों से शुद्धि के लिए प्रार्थना १-३
२०. प्रबल पित्त ज्वर से छुटकारे की कामना १-३
२१. धनवती ओषधियों का वर्णन १-३
२२. आदित्य, रश्मि व मरुत् की स्तुति १-३
२३. जल की प्रशंसा १-३
२४. जल का वर्णन १-३
२५. मन्युविनाशन १-३
२६. पाप्मा की स्तुति १-३
२७. यम की पूजा अर्चना १-३
२८. यम की प्रशंसा १-३
२९. यम की स्तुति १-३
३०. जौ सौभाग्य सूचक शमी का वर्णन १-३
३१. गौ अर्थात् सूर्य की किरणों का वर्णन १-३
३२. अग्नि की स्तुति १-३
३३. इंद्र की स्तुति १-३
३४. अग्नि की स्तुति १-५
३५. वैश्वानर अग्नि की स्तुति १-३
३६. वैश्वानर अग्नि की आराधना १-३
३७. इंद्र की स्तुति १-३
३८. तेजस्वरूपा देवी की स्तुति १-४
३९. इंद्र की स्तुति १-३
४०. द्यावा, पृथ्वी व इंद्र की आराधना १-३
४१. प्राण के अधिष्ठाता देव एवं दिव्यगुणों की प्रशंसा १-३
४२. पुरुष के लिए उपदेश १-३
४३. क्रोध को शांत करना १-३
४४. गाय के सींग द्वारा विषाण रोग का इलाज १-३
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४५. दुःस्वप्न का विनाश १-३
४६. दुःस्वप्न का विनाश १-३
४७. अग्नि की स्तुति १-३
४८. सवन नामक यज्ञ का उल्लेख १-३
४९. अग्नि की स्तुति १-३
५०. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-३
५१. वरुण देव की स्तुति १-३
५२. सूर्य देव की स्तुति १-३
५३. पृथ्वी आदि की स्तुति १-३
५४. इंद्र, अग्नि और सोम की स्तुति १-३
५५. छह ऋतुओं के अधिष्ठाता देवों की प्रशंसा १-३
५६. विश्वे देव और रुद्र की स्तुति १-३
५७. रोग की ओषधि का वर्णन १-३
५८. इंद्र, सविता, अग्नि, सोम आदि की प्रशंसा १-३
५९. सहदेवी नामक ओषधि का वर्णन १-३
६०. अर्यमा देव की स्तुति १-३
६१. जल के अधिष्ठाता देव की स्तुति १-३
६२. वैश्वानर अग्नि की स्तुति १-३
६३. अनिष्टकारिणी देवी निर्ऋति का वर्णन १-४
६४. सोमनस्य के इच्छुक जनों को उपदेश १-३
६५. इंद्र की स्तुति १-३
६६. इंद्र की स्तुति १-३
६७. इंद्र की स्तुति १-३
६८. सविता देव व माता अदिति की प्रशंसा १-३
६९. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-३
७०. प्रेम बंधन का वर्णन १-३
७१. अग्नि की प्रशंसा १-३
७२. अर्क मणि का वर्णन १-३
७३. वरुण देव की स्तुति १-३
७४. ब्रह्मणस्पति देव की स्तुति १-३
७५. इंद्र की स्तुति १-३
७६. सायंतन अग्नि की स्तुति १-४
७७. जातवेद अग्नि की प्रशंसा १-३
७८. अग्नि देव की प्रशंसा १-३
७९. अंतरिक्ष के पालनकर्ता अग्नि की प्रशंसा १-३
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८०. अग्नि की स्तुति १-३
८१. अग्नि की स्तुति १-३
८२. इंद्र की प्रशंसा १-३
८३. सूर्य द्वारा गंडमालाओं की चिकित्सा १-४
८४. निर्ऋति का वर्णन १-४
८५. वरण मणि द्वारा राजयक्ष्मा रोग का निवारण १-३
८६. इंद्र की स्तुति १-३
८७. अच्छे राजा की कामना १-३
८८. अच्छे राज्य के लिए वरुण, बृहस्पति
और सूर्य की प्रशंसा १-३
८९. वरुण, सरस्वती, आदि की पतिपत्नी
मिलन के लिए प्रशंसा १-३
९०. रुद्र देव की प्रशंसा १-३
९१. यक्ष्मा रोग का विनाश १-३
९२. वेगवान अश्व की प्रशंसा १-३
९३. यम आदि की प्रशंसा १-३
९४. सरस्वती देवी की आराधना १-३
९५. कूठ वनस्पति का वर्णन १-३
९६. वनस्पतियों के देव राजा सोम की प्रशंसा १-३
९७. मेधावी मित्र और वरुण का वर्णन १-३
९८. इंद्र की स्तुति १-४
९९. इंद्र की स्तुति १-३
१००. इड़ा, सरस्वती और भारती द्वारा विष विनाशक
ओषधि प्रदान करना १-३
१०१. पुरुष को गर्भाधान करने में समर्थ होने का आशीर्वाद १-३
१०२. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-३
१०३. बृहस्पति देव की आराधना १-२
१०४. इंद्र और अग्नि की प्रशंसा १-३
१०५. खांसी रोग से मुक्ति की कामना १-३
१०६. अग्निशाला की स्तुति १-३
१०७. विश्वजित देव की स्तुति १-४
१०८. मेधा देवी और अग्नि की आराधना १-५
१०९. पिप्पली ओषधि का वर्णन १-३
११०. अग्नि देव की स्तुति १-३
१११. अग्नि की स्तुति १-४
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११२. अग्नि की स्तुति १-३
११३. पूषा देव की स्तुति १-३
११४. अग्नि और अदिति पुत्र देवों की प्रशंसा १-३
११५. विश्वे देव की स्तुति १-३
पाप से छुटकारे का आग्रह २
११६. विवस्वान की स्तुति १-३
क्रोध शांत हो ३
११७. अग्नि की स्तुति १-३
ऋण की वापसी २
११८. उग्रंपश्या एवं उग्रजिता अप्सराओं की स्तुति १-३
पाप ऋण से मुक्ति की कामना २
११९. वैश्वानर अग्नि की स्तुति १-३
लौकिक और दैविक ऋणों रूप
फंदों को ढीला करना २
१२०. अग्नि की स्तुति १-३
पृथ्वी, अदिति, अंतरिक्ष तथा आकाश का वर्णन २
स्वर्ग में अपने माता, पिता तथा पुत्रों से मिलना ३
१२१. बंधन के देवता निर्ऋति की स्तुति १-४
बंधनों से मुक्ति की कामना २
१२२. विश्वकर्मा की स्तुति १-५
अग्नि की स्तुति ४
इंद्र से अभिलाषा पूरी करने की कामना ५
१२३. स्वर्ग में विराजमान देवों की स्तुति १-५
पितरों का वर्णन ३
यज्ञ करना और दान देना ४
सोम से स्वर्ग में स्थित रहने की प्रार्थना ५
१२४. अग्नि की स्तुति १-३
जल वृक्ष का फल ही है २
१२५. वनस्पति की स्तुति १-३
वृक्ष से प्राप्त रस का वर्णन २
दिव्य गुणों से युक्त रथों की तुलना ३
१२६. दुंदुभि की स्तुति १-३
दुंदुभि से बल को बढ़ाने के लिए प्रार्थना २
इंद्र की प्रशंसा ३
१२७. विसर्प व्याधि ओषधि का वर्णन १-३
पीपुद्र नाम की ओषधि का वर्णन २
१२८. शंकधूम और चंद्रमा की स्तुति १-४
१२९. भग देव की प्रशंसा १-३
१३०. माष नाम की जड़ीबूटी का वर्णन १-४
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मरुद्गण और अग्नि देव की स्तुति ४
१३१. संकल्प की देवी आकूति की प्रशंसा १-३
१३२. देवों द्वारा कामदेव व उस की पत्नी आधि को
जल में डुबोया जाना १-५
मित्र और वरुण देवों द्वारा कामदेव व उस की पत्नी
आधि को जल में डुबोया जाना ५
१३३. शत्रु को मारने के लिए बांधी जाने वाली मेखला का वर्णन १-५
शत्रु के विनाश हेतु यमराज से प्रार्थना ३
१३४. वज्र का वर्णन व स्तुति १-३
१३५. वज्र का वर्णन व स्तुति १-३
शत्रु का विनाश ३
१३६. कालमाची नामक जड़ीबूटी का वर्णन व स्तुति १-३
केशों को उत्पन्न करना और दृढ़ बनाना २
१३७. वनस्पति की प्रशंसा १-३
केशों का बढ़ना ३
१३८. शक्तिहीन करने वाली जड़ीबूटी १-५
वीर्यवाहिनी नाड़ियों का नाश ४
१३९. शंखपुष्पी जड़ीबूटी का वर्णन १-५
१४०. ब्रह्मणस्पति देव और जातवेद अग्नि की स्तुति १-३
१४१. वायु, त्वष्टा, रुद्र देव आदि की गायों की वृद्धि
और चिकित्सा के लिए स्तुति १-३
गायों की असीमित वृद्धि के लिए
अश्विनीकुमारों की प्रशंसा ३
१४२. जौ नामक अन्न की प्रशंसा १-३
जौ को खाने और ले जाने वाले विनाश रहित हों ३
सातवां कांड
सूक्त विषय मंत्र
१. प्रजापति द्वारा संसार के लोगों को
अपने अपने कर्म करने की प्रेरणा देना १-२
२. प्रजापति की स्तुति १
३. प्रजापति की स्तुति १
४. वायु देव की स्तुति १
५. यज्ञ रूप प्रजापति की प्रशंसा १-५
६. पृथ्वी एवं देवमाता का वर्णन १-२
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७. अदिति की स्तुति १-२
८. अदिति के पुत्रों अर्थात देवों का वर्णन १
९. बृहस्पति की स्तुति १
१०. सब के पोषक सूर्य देव की स्तुति १-४
११. सरस्वती की स्तुति १
१२. पर्जन्य देव की स्तुति १
१३. प्रजापति की दोनों पुत्रियों,
सभा तथा सभासदों की स्तुति १-४
१४. द्वेष करने वाले पुरुषों के तेज का विनाश १-२
१५. सविता देव की स्तुति १-४
१६. सब के प्रेरक सविता देव की स्तुति १
१७. बृहस्पति एवं सविता देव की स्तुति १
१८. धाता देव की स्तुति १-४
सविता व प्रजापति की स्तुति ४
१९. धाता की प्रशंसा १-२
२०. प्रजापति और धाता की स्तुति १
२१. अनुमति नामक देवी की प्रशंसा १-६
सुख प्राप्त करने का अनुग्रह ३
सुप्रणीति देवी से यज्ञ पूर्ण करने का आग्रह ४
२२. पुरातन सूर्य की प्रशंसा १
२३. सत्कर्म की प्रेरणा देने के लिए सूर्य देव की स्तुति १-२
२४. दुःस्वप्न विनाश की कामना १
२५. सविता व प्रजापति देव की आराधना १
२६. विष्णु और वरुण की प्रशंसा १-२
२७. विष्णु के वीरतापूर्ण कर्मों का वर्णन १-८
२८. इडा की स्तुति १
२९. काम में आने वाले उपकरणों की प्रशंसा १
३०. अग्नि और विष्णु की स्तुति १-२
३१. देवों से यज्ञ के यूपों को रंगने की कामना १
३२. धनवान एवं शौर्य संपन्न इंद्र की प्रशंसा १
३३. अग्नि देव की स्तुति १
३४. मरुत् आदि देवगणों से सुखसमृद्धि की कामना १
३५. अग्नि देव व अदीना देवमाता की प्रशंसा १
३६. अग्नि से शत्रुओं के विनाश की कामना १-३
विद्वेष करने वाली स्त्री २
संतान रहित नारी ३
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३७. पत्नी तथा पति का परस्पर अनुरक्त होना १
३८. मंत्र से युक्त वस्त्र १
३९. सौवर्चा नामक जड़ी का वर्णन १-५
पति वशीकरण २
शंखपुष्पी ३
४०. सारस्वत देव की प्रशंसा १
४१. सरस्वन् देवी की स्तुति १-२
४२. सूर्य और इंद्र की स्तुति १-२
४३. अमीवा नामक रोग के लिए सोम
एवं रुद्र देव की प्रार्थना १-२
४४. वाणियों के रूप १
४५. इंद्र और विष्णु की आराधना १
४६. सक्तुमंथ नामक जड़ीबूटी का वर्णन १
४७. ईर्ष्या को शांत करने के लिए आग्रह १
४८. सिनीवाली की प्रशंसा १-३
४९. कुहू की प्रशंसा १-२
५०. शोभित व शोभन स्तुति वाली पूर्णिमा का आह्वान १-२
५१. सुख के लिए देव पत्नियों की स्तुति १-२
५२. अग्नि की स्तुति १-९
जुआरियों का वध १
जुआरियों को जीतने के लिए इंद्र से प्रार्थना ४
इंद्र की प्रशंसा ७
विजय के लिए पासों की पूजा ९
५३. शत्रु से रक्षा के लिए बृहस्पति व इंद्र की प्रशंसा १
५४. आपस में सौमनस्य के लिए
अश्विनीकुमारों की आराधना १-२
५५. बृहस्पति, अग्नि और अश्विनी कुमारों की स्तुति १-७
प्राण और अपान वायु २
आयु की कामना ३
स्वर्ग में आरोहण ७
५६. इंद्र से सुख की कामना १
५७. ऋग्वेद और सामवेद का पूजन १-२
५८. मधु नामक जड़ीबूटी का वर्णन १-८
सर्प का विष निकालना २
शर्कोटक सर्प के टुकड़े ५
परपीडादायक बिच्छू ६
विषनाशक जड़ीबूटी ७
५९. सरस्वती की स्तुति १-२
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६०. सोमरस की प्रार्थना १-२
सोमरस पीने के लिए इंद्र और वरुण का आह्वान २
६१. निंदा करने वाले शत्रु का विनाश १
६२. घरों की स्तुति १-७
घरों में सौमनस्य ३
घर धनधान्य से परिपूर्ण हों ४
घरों में गाएं, बकरियां व भेड़ें हों ५
६३. तप के लिए अग्नि देव की स्तुति १-२
६४. प्रजा को वश में करने की कामना १
६५. अग्नि की स्तुति १
६६. अभिमंत्रित जल द्वारा कौवे के पंखों
की चोट से रक्षा १-२
मृत्यु देवता की आराधना २
६७. अपामार्ग की स्तुति १-३
पाप का निवारण ३
६८. वेदाध्ययन का फल १
६९. इंद्रियों की शक्ति की कामना १
७०. सरस्वती देवी की प्रशंसा १-२
७१. सरस्वती देवी की प्रशंसा १
७२. सुख की कामना १
७३. निर्ऋति देवी की स्तुति १-५
अजिर और अधिराज ३
७४. अग्नि की स्तुति १
७५. इंद्र के लिए हवि का पकाया जाना १-२
हवि के लिए इंद्र का आह्वान २
७६. दूध के रूप में हवि १
७७. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-११
गोशाला ४
सविता देव व उषा ६
गाय का आह्वान ७
अग्नि की स्तुति ९
अग्नि की स्तुति १०
धर्मदुघा धेनु ११
७८. गंडमालाओं का वर्णन १-४
क्रोध का विनाश ३
जातवेद अग्नि ४
७९. गायों की स्तुति १-२
गोशाला ३
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८०. मंत्र और ओषधि के प्रयोग १-४
क्षय रोग का वर्णन ४
८१. क्षय रोग १-२
सोमरस ३
८२. मरुतों की स्तुति १-३
८३. अग्नि की स्तुति १-२
८४. अमावस्या का वर्णन और स्तुति १-४
अन्न और धन ३
८५. पूर्णमासी की स्तुति १-४
पूर्णमास यज्ञ २
प्रजापति की प्रशंसा ३
८६. सूर्य और चंद्र का वर्णन १-६
सोम ३
चंद्रकलाओं का वर्णन ४
८७. अग्नि की स्तुति १-६
८८. वरुण की स्तुति १-४
८९. अग्नि व इंद्र की स्तुति १-३
इंद्र की प्रशंसा २
९०. गरुड़ का आह्वान १
९१. इंद्र का आह्वान १
९२. अग्नि रूप इंद्र की प्रशंसा १
९३. सर्पविष का विनाश १
९४. अग्नि की स्तुति १-४
जल की स्तुति ३
९५. अग्नि व इंद्र की स्तुति १-३
९६. धन के स्वामी इंद्र की प्रशंसा १
९७. इंद्र की प्रशंसा १
९८. इंद्र की स्तुति १
९९. सोमरस १
१००. उच्छोचन व प्रशोचन नामक मृत्यु देव १-३
१०१. शत्रु और भेड़िया १
१०२. अग्नि की स्तुति १-८
इंद्र की आराधना २
यज्ञ ५
मार्ग को जानने वाला देव ७
१०३. इंद्र की स्तुति १
१०४. यज्ञ वेदी १
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१०५. बुरे स्वप्न का विनाश १
१०६. स्वप्न में खाया अन्न दिन में दिखाई न देना १
१०७. धरती, आकाश अंतरिक्ष और मृत्यु को नमस्कार १
१०८. राजा का आह्वान १
१०९. बृहस्पति देव की स्तुति १
११०. ब्रह्मचारी का वर्णन १
१११. अग्नि की स्तुति १
११२. सूर्य की स्तुति १
११३. अग्नि देव की स्तुति १-२
११४. अग्नि की स्तुति १-७
जुए की देवियां ३
गंधर्व ६
११५. अग्नि और इंद्र की प्रशंसा १-३
११६. वृषभ की प्रशंसा १
११७. द्यावा पृथ्वी की स्तुति १-२
पाप से छुटकारा ३
११८. वाणापर्ण्य जड़ीबूटी का वर्णन १-२
११९. अग्नि की स्तुति १-२
मानसिक व्याधि २
१२०. सविता देव की स्तुति १-४
दरिद्रता २
अग्नि देव की प्रशंसा ३
पुण्य और पापकारिणी लक्ष्मियां ४
१२१. उष्णि्क ज्वर से संबंधित देव की प्रशंसा १-२
१२२. इंद्र की स्तुति १
१२३. सोम व वरुण की स्तुति १
आठवां कांड
सूक्त विषय मंत्र
१. मृत्यु देव की स्तुति १-२१
पाप देवता के बंधनों से उद्धार ३
मृत्यु से छुटकारा ६
अंधकार से प्रकाश की ओर ८
वाडव आदि अग्नियों द्वारा रक्षा ११
मृत्यु से छीनने वाले इंद्र, धाता एवं सविता १५
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अदिति पुत्र देव मृत्यु से छुड़ाएं १६
द्यौ देवता एवं पृथ्वी १७
बाहरी और आंतरिक रोगों का विनाश २१
२. आयु की कामना १-२८
निंदा से मुक्ति ३
पुरुष की चिकित्सा ५
ग्वारपाठा नामक जड़ीबूटी ६
भव और शर्व की स्तुति ७
रुद्र आदि देव ९
अग्नि से प्राणों की याचना १३
सविता देव की प्रशंसा १७
बालक की रक्षा २०
शांति २६
३. अग्नि देव की स्तुति १-२६
४. इंद्र और सोम की स्तुति १-२५
सोम देव द्वारा पापी राक्षस का वध १३
मरुतों की प्रशंसा १८
५. तिलक वृक्ष से निर्मित मणि का वर्णन १-२२
कृत्या राक्षसी से बचाव ७
तिलक वृक्ष की स्तुति ११
मणि की महिमा १३
इंद्र का वर्णन १७
६. दुर्नाम और सुनाम नामक रोगों और
उनके निवारण का वर्णन १-२६
पीली सरसों रूपी ओषधि ६
ककुंभ पिशाचों का नाश ११
गर्भ की रक्षा १८
७. आयुष्य ओषधियों का वर्णन १-२८
वृक्षों का गर्भ पीपल २०
८. इंद्र की स्तुति १-२४
पीपल और खैर के वृक्ष ३
इंद्र से शत्रु वध का आग्रह ६
सूर्य की प्रशंसा ७
मृत्युदूतों से शत्रुवध का आग्रह ११
अग्नि का वर्णन २३
९. विराट के दोनों वत्सों का वर्णन १-२६
विराट का वर्णन ११
सूर्य, चंद्र एवं अग्नि का वर्णन १३
छः मास १७
सात होम १८
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१०. (१) विराट् का वर्णन १-१३
१०. (२) विराट् का वर्णन १-१०
१०. (३) विराट् का वर्णन १-८
१०. (४) विराट् का वर्णन १-१६
१०. (५) विराट् का वर्णन १-१६
१०. (६) विराट् का वर्णन १-४
नौवां कांड
सूक्त विषय मंत्र
१. मधुकशा गौ की स्तुति व वर्णन १-२४
सोमरस १३
अग्नि की स्तुति १५
अश्विनीकुमारों की स्तुति १७
२. वृषभ रूपी काम की स्तुति १-२५
काम देव से दरिद्रता दूर करने की प्रार्थना ४
काम देव की स्तुति १०
अग्नि, इंद्र और सोम १३
काम देव की स्तुति २५
३. शालाओं का वर्णन १-३१
शाला की पूर्व दिशा को नमस्कार २५
४. शक्तिशाली ऋषभ का वर्णन १-२४
जड़ीबूटियों के रस का परिचय ५
बैल का दान १८
५. अज का वर्णन १-३८
अज ही अग्नि है और अज ही ज्योति है ७
अग्नि की प्रशंसा १७
पंचौदन ३१
६. अतिथि सत्कार का वर्णन १-१७
७. अतिथि सत्कार का वर्णन १-१३
८. अतिथि सत्कार का वर्णन १-९
९. अतिथि सत्कार का वर्णन १-१०
१०. अतिथि सत्कार का वर्णन १-१०
११. अतिथि सत्कार का वर्णन १-१४
१२. गो महिमा वर्णन १-२६
१३. सर्वशीर्षामय दूरीकरण तथा सभी
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ㅤㅤㅤरोगों का दूरीकरणㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-२२
१४.ㅤसूर्य की स्तुतिㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-२२
ㅤㅤㅤपाँच अरों वाला पहियाㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ११
ㅤㅤㅤबारह आकृतियांㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१२
ㅤㅤㅤबारह अरों वाला पहियाㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१३
१५.ㅤगायत्र का वर्णनㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-२८
ㅤㅤㅤगायत्र यज्ञ की तीन समिधाएंㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ३
ㅤㅤㅤभूमि की पूजाㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ२०
ㅤㅤㅤमित्र और वरुण का रूपㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ२३
ㅤㅤㅤतीन ज्योतियांㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ२६
ㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤदसवां कांड
सूक्तㅤविषयㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤमंत्र
१.ㅤㅤकृत्या का परित्यागㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-३२
२.ㅤㅤमनुष्य के शरीर का निर्माणㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-३३
ㅤㅤㅤदेवों की नगरी का वर्णनㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ३१
३.ㅤㅤवरणमणि का वर्णनㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-२५
ㅤㅤㅤसमस्त रोगों की ओषधिㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ३
ㅤㅤㅤसोमपीथ और मधुपर्क यज्ञㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ२१
४.ㅤㅤदेवों के रथों का वर्णनㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-२६
ㅤㅤㅤश्वेत पद द्वारा सर्पों का विनाशㅤㅤㅤㅤㅤㅤ३
ㅤㅤㅤइंद्र की प्रशंसाㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१७
५.ㅤㅤजल की स्तुति तथा वर्णनㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-५०
ㅤㅤㅤसप्तऋषियों का अनुवर्तनㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ३९
ㅤㅤㅤदिव्यजनों और अग्नि देव से प्रार्थनाㅤㅤㅤㅤ४६
६.ㅤㅤवनस्पतिफला मणि का वर्णनㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-३५
ㅤㅤㅤअग्नि का आह्वानㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ३५
७.ㅤㅤअंगों की महत्ता का बखानㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-४४
ㅤㅤㅤवह जगदाधार कौन हैㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ४
ㅤㅤㅤश्रेष्ठ परमात्मा को नमस्कारㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ३६
८.ㅤㅤब्रह्म की स्तुतिㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-४४
ㅤㅤㅤबारह अरे तथा तीन नेमियांㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ४
ㅤㅤㅤपरमात्मा संसार के मध्य स्थित हैㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१५
ㅤㅤㅤआत्म तत्त्व एक हैㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ२५
९.ㅤㅤशतौदना गो का वर्णन व स्तुतिㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-२७
१०.ㅤवशा गौ का वर्णन व स्तुतिㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤㅤ१-३४
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ग्यारहवां कांड
सूक्त विषय मंत्र
१. अग्नि देव की स्तुति १-३७
ब्रह्मौदनासव यज्ञ २०
सोमरूपी ब्रह्मौदन २६
२. भव और शर्व की स्तुति १-३१
पशुपति को नमस्कार ६
अतिशय बलशाली रुद्र की स्तुति १०
रुद्र के आयुध २२
३. बृहस्पति का भोजन १-३१
ओदन की महिमा जानने वाला प्रसिद्ध गुरु २३
४. ओदन का खाया जाना १-६
५. ओदन की स्थिति १-१८
६. प्राण के लिए नमस्कार १-२६
प्राण अर्थात सूर्य देव ३
७. ब्रह्मचारी की महिमा का वर्णन १-२६
ब्रह्मचारी की पहली समिधा ४
ब्रह्मचारी पहली भिक्षा ९
८. अग्नि, वनस्पति, जड़ीबूटी और
फसलों की स्तुति १-२३
सभी देवों की स्तुति २
इंद्र तथा मातलि की प्रशंसा २३
९. हवन से बचा भात १-२७
यज्ञ शेष की प्रशंसा ११
नौ खंडों वाली पृथ्वी १४
१०. सृष्टि की रचना १-३४
प्रलय काल के महासागर में तप और कर्म ६
इंद्र, अग्नि, सोम, त्वष्टा की उत्पत्ति ८
ज्ञानेंद्रियां तथा कर्मेंद्रियां १३
परमेश्वर और माया १७
११. अर्बुदि सर्प की स्तुति १-२६
१२. युद्ध के लिए तैयार होने की प्रेरणा १-२७
जातवेद अग्नि और आदित्य की स्तुति ४
श्वेत चरणों वाली गाय ६
ब्रह्मणस्पति देव से विजय प्रदान करने का अनुरोध ९
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बारहवां कांड
सूक्त विषय मंत्र
१. पृथ्वी की स्तुति व वर्णन १-६३
धरातल की विशेषता २
पृथ्वी का निर्माण १०
२. कुंताप अग्नि को दूर करना १-५५
शव भक्षक अग्नि १२
गार्हपत्य अग्नि की स्तुति १८
३. अग्नि की स्तुति १-६०
ओदन का प्रभाव ३
पृथ्वी की स्तुति १२
वनस्पति की प्रशंसा १८
४. गोदान का वर्णन १-५३
वशा गौ का वर्णन ३
नारद की स्तुति ४५
५. ब्रह्मगवी का वर्णन १-६
६. ब्रह्मगवी का वर्णन १-५
७. ब्रह्मगवी का वर्णन १-१६
८. ब्रह्मगवी का वर्णन १-११
९. ब्रह्मगवी का वर्णन १-८
१०. ब्रह्मगवी का वर्णन १-१५
११. ब्रह्मगवी का वर्णन १-१२
तेरहवां कांड
सूक्त विषय मंत्र
१. सूर्य देव की स्तुति १-६०
अग्नि की स्तुति १५
वाचस्पति की प्रशंसा १७
यज्ञ की वृद्धि ६०
२. सूर्य देव की स्तुति १-४६
रोहित देव का वर्णन और प्रशंसा ४१
३. रोहित देव की स्तुति १-२६
४. सूर्य की स्तुति १-१३
५. एक वृत्त अर्थात् ब्रह्म के ज्ञाता १-७
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६. ब्रह्म के ज्ञाता का वर्णन १-७
७. ब्रह्म के ज्ञाता का वर्णन १-१७
८. इंद्र की स्तुति १-६
९. ब्रह्म वर्चस प्रदान करने की कामना १-५
चौदहवां कांड
सूक्त विषय मंत्र
१. सोम की स्तुति १-६४
अश्विनीकुमारों की प्रशंसा १४
इंद्र की प्रशंसा १८
चंद्र का वर्णन २४
गायों की स्तुति ३२
बृहस्पति, इंद्र और सविता देव की प्रशंसा ६२
२. अग्नि देव की स्तुति १-७५
सरस्वती की प्रशंसा १५
स्त्री के लिए सुखकारी उपदेश २६
वंशवृद्धि ३१
बृहस्पति देव का वर्णन ५३
पति और पत्नी का प्रेम ६४
सविता देव से दीर्घजीवन की कामना ७५
पंद्रहवां कांड
सूक्त विषय मंत्र
१. समूहों का हित करने वाले समूह पति का वर्णन १-८
२. व्रात्य का वर्णन १-२८
शरीर रूपी रथ का वर्णन ७
३. व्रात्य का वर्णन १-११
आसंदी और बैठने की चौकी २
ऋग्वेद के मंत्र और यजुर्वेद के मंत्र
आसंदी बुनने के तंतु ६
४. व्रात्य का वर्णन १-१८
ऋतुओं के रक्षक ४
५. भव अर्थात् महादेव का वर्णन १-१६
रुद्र ध्रुव दिशा के रक्षक १२
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