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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 95 of 1063

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Page 95

तुम ने हमारी ओर दरिद्रता प्रदान करने वाली जो राक्षसी और राक्षस भेजे हैं, वे हमारी ओर
से लौट जाएं. तुम्हारे जो आयुध हैं वे भी लौट जाएं. तुम्हारे अनुचर चोर भी लौट जाएं. तुम
हमारे जिस शत्रु के हो उसी के पास चले जाओ तथा उसे खा डालो. जिस प्रयोग करने वाले
ने तुम्हें मेरे पास भेजा है, तुम उसी को खाओ. तुम उस का मांस भक्षण करो. (३)
सर्पानुसर्प पुनर्वो यन्तु यातवः पुनर्हेतिः किमीदिनः.
यस्य स्थ तमत्त यो वः प्राहैत् तमत्त स्वा मांसान्यत्त.. (४)
हे कुटिल चलने वाले राक्षसों के स्वामी एवं उस के अनुचर! तुम ने हमारी ओर दरिद्रता
प्रदान करने वाली राक्षसी और राक्षस भेजे हैं, वे हमारी ओर से लौट जाएं. तुम्हारे जो आयुध
हैं, वे भी लौट जाएं. तुम्हारे अनुचर चोर भी चले जाएं. तुम हमारे जिस शत्रु के हो, उसी के
पास चले जाओ तथा उसे खा डालो. जिस प्रयोग करने वाले ने तुम्हें हमारे पास भेजा है, तुम
उसी को खाओ. तुम उसी का मांस भक्षण करो. (४)
जूर्णि पुनर्वो यन्तु यातवः पुनर्हेतिः किमीदिनीः.
यस्य स्थ तमत्त यो वः प्राहैत् तमत्त स्वा मांसान्यत्त.. (५)
हे प्राणियों के शरीर को वृद्ध बनाने वाली राक्षसी! तूने हमारी ओर दरिद्रता प्रदान करने
वाली जो राक्षसियां भेजी हैं, वे हमारी ओर से लौट जाएं. तेरे जो आयुध हैं वे भी लौट जाएं.
तेरे अनुचर चोर भी लौट जाएं. तू हमारे जिस शत्रु की है, उसी के पास चली जा तथा उसे खा
डाल. जिस प्रयोग करने वाले ने तुझे मेरे पास भेजा है, तू उसी को खा. तू उसी का मांस
भक्षण कर. (५)
उपब्दे पुनर्वो यन्तु यातवः पुनर्हेतिः किमीदिनीः.
यस्य स्थ तमत्त यो वः प्राहैत् तमत्त स्वा मांसान्यत्त.. (६)
हे क्रूर शब्द करने वाली राक्षसी! तुम ने हमारी ओर दरिद्रता प्रदान करने वाली जो
राक्षसियां भेजी हैं, वे हमारी ओर से लौट जाएं. तुम्हारे जो आयुध हैं, वे भी लौट जाएं. तुम्हारे
अनुचर चोर भी चले जाएं. तुम हमारे जिस शत्रु की हो, उसी के पास चली जाओ तथा उसे
खा डालो. जिस प्रयोग करने वाले ने तुम्हें मेरे पास भेजा है, तुम उसी को खाओ. तुम उसी
का मांस भक्षण करो. (६)
अर्जुनि पुनर्वो यन्तु यातवः पुनर्हेतिः किमीदिनीः.
यस्य स्थ तमत्त यो वः प्राहैत् तमत्त स्वा मांसान्यत्त.. (७)
हे अर्जुन वृक्ष के समान रंग वाली राक्षसी! तुम ने मेरी ओर दरिद्रता प्रदान करने वाली
जो राक्षसी भेजी है, वह हमारी ओर से लौट जाए. तुम्हारे जो आयुध हैं, वे भी लौट जाएं.
तुम्हारे अनुचर चोर भी चले जाएं. तुम हमारे जिस शत्रु की हो, उसी के पास चली जाओ तथा
उसे खा डालो. जिस प्रयोग करने वाले ने तुम्हें मेरे पास भेजा है, तुम उसी को खाओ. तुम
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