अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 94 of 1063
Read in contextहे जल देव! तुम्हारी जो दीप्ति है, उस के द्वारा उन लोगों को दीप्तिहीन बनाओ जो हम
से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (३)
आपो यद् वः शोचिस्तेन तं प्रति शोचत यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः..
(४)
हे जल देव! तुम्हारी जो दूसरों को शोकमग्न करने की शक्ति है, उस से उन्हें शोकमग्न
करो जो हम से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (४)
आपो यद् वस्तेजस्तेन तमतेजसं कृणुत यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः..
(५)
हे जल देव! तुम्हारा जो तेज है, उस के द्वारा उन लोगों को तेजहीन बनाओ जो हम से
द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (५)
सूक्त-२४ देवता—आयुध
शेरभक शेरभ पुनर्वो यन्तु यातवः पुनर्हेतिः किमीदिनः.
यस्य स्थ तमत्त यो वः प्राहैत् तमत्त स्वा मांसान्यत्त.. (१)
हे राक्षसों के गांव के मुखिया और राक्षसों के स्वामी! तुम ने हमारी ओर जो दरिद्रता
प्रदान करने वाली राक्षसी भेजी है तथा जो राक्षस भेजे हैं, वे हमारी ओर से लौट जाएं. तुम्हारे
जो आयुध हैं, वे भी लौट जाएं. तुम्हारे अनुचर चोर भी लौट जाएं. तुम हमारे जिस शत्रु के हो,
उसी के पास चले जाओ तथा उसे खा डालो. जिस प्रयोग करने वाले ने तुम्हें मेरे पास भेजा
है. तुम उसी को खाओ. तुम उसी का मांस भक्षण करो. (१)
शेवृधक शेवृध पुनर्वो यन्तु यातवः पुनर्हेतिः किमीदिनः.
यस्य स्थ तमत्त यो वः प्राहैत् तमत्त स्वा मांसान्यत्त.. (२)
हे अपने आश्रितों का सुख बढ़ाने वाले एवं गांव के मुखिया के स्वामी! तुम ने हमारी
ओर जो दरिद्रता प्रदान करने वाली राक्षसी भेजी है तथा जो राक्षस भेजे हैं, वे हमारी ओर से
लौट जाएं. तुम्हारे जो आयुध हैं वे भी लौट जाएं. तुम्हारे अनुचर चोर भी लौट जाएं. तुम
हमारे जिस शत्रु के हो, उसी के पास चले जाओ तथा उसे खा डालो. जिस प्रयोग करने वाले
ने तुम्हें मेरे पास भेजा है, तुम उसी को खाओ. तुम उसी का मांस भक्षण करो. (२)
म्रोकानुम्रोक पुनर्वो यन्तु यातवः पुनर्हेतिः किमीदिनः.
यस्य स्थ तमत्त यो वः प्राहैत् तमत्त स्वा मांसान्यत्त.. (३)
हे धन आदि छीन कर छिपे रूप में चलने वाले एवं उस का अनुसरण करने वाले चोरो!
ebook converter DEMO Watermarks*