अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextजीवेम शरदः शतम्.. (२)
हे सूर्य! हम सौ वर्षों तक जीवित रहें. (२)
बुध्येम शरदः शतम्.. (३)
हे सूर्य! हम सौ वर्षों तक बुद्धि युक्त रहें. (३)
रोहेम शरदः शतम्.. (४)
हे सूर्य! हम सौ वर्षों तक वृद्धि करते रहें. (४)
पूषेम शरदः शतम्.. (५)
हे सूर्य! हम सौ वर्षों तक पुष्ट रहें. (५)
भवेम शरदः शतम्.. (६)
हे सूर्य! हम सौ वर्षों तक पुत्र आदि से युक्त रहें. (६)
भूयेम शरदः शतम्.. (७)
हे सूर्य! हम सौ वर्षों तक संतान वाले रहें. (७)
भूयसीः शरदः शतात्.. (८)
हे सूर्य देव! हम सौ वर्षों से भी अधिक समय तक जीवित रहें. (८)
सूक्त—६८ देवता—मंत्र में बताए गए
अव्यसश्च व्यचसश्च बिलं वि ष्यामि मायया.
ताभ्यामुद्धृत्य वेदमथ कर्माणि कृण्महे.. (१)
मैं सभी के शरीरों में व्याप्त व्यान वायु और व्यक्तिगत रूप से व्याप्त प्राण वायु के मूल
आधार को कर्म के द्वारा विस्तृत करता हूं. हम उन व्यान और प्राण वायु के द्वारा अक्षरात्मक
वेद को परा, पश्यंती और वैखरी वाणियों के क्रम से प्रत्यक्ष कर के यज्ञ कर्म करते हैं. (१)
सूक्त—६९ देवता—आप अर्थात् जल
जीवा स्थ जीव्यासं सर्वमायुर्जीव्यासम्.. (१)
हे देवगण! आप आयु वाले हैं. आप की कृपा से मैं भी आयु वाला बनूं. मैं पूर्ण आयु
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