अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextअर्थात् सौ वर्ष तक जीवित रहूं. (१)
उपजीवा स्थोप जीव्यासं सर्वमायुर्जीव्यासम्.. (२)
हे देवगण! आप अधिक जीवन वाले हैं. आप की कृपा से मैं भी अधिक जीवन वाला
बनूं. मैं सौ वर्ष तक जीवित रहूं. (२)
संजीवा स्थ सं जीव्यासं सर्वमायुर्जीव्यासम्.. (३)
हे देवगण! आप जीवन का एक क्षण भी व्यर्थ नहीं करते हैं. मैं भी आप की कृपा से
जीवन का एक क्षण भी व्यर्थ न करूं. मैं सौ वर्ष तक जीवित रहूं. (३)
जीवला स्थ जीव्यासं सर्वमायुर्जीव्यासम्.. (४)
हे इंद्र! तुम सभी ऐश्वर्यों के प्रकाशक हो. मैं भी तुम्हारी कृपा से पूर्ण ऐश्वर्य का प्रकाशक
बनूं. मैं सौ वर्ष तक जीवित रहूं. (४)
सूक्त—७० देवता—मंत्र में कथित इंद्र
आदि
इन्द्र जीव सूर्य जीव देवा जीवा जीव्यासमहम्. सर्वमायुर्जीव्यासम्.. (१)
हे इंद्र! तुम जीवित रहो. हे सूर्य! तुम जीवित रहो. हे इंद्र आदि देवो! तुम जीवित रहो. मैं
भी आप की कृपा से जीवित रहूं. मैं पूर्ण आयु अर्थात् सौ वर्ष तक जीवित रहूं. (१)
सूक्त—७१ देवता—गायत्री
स्तुता मया वरदा वेदमाता प्र चोदयन्तां पावमानी द्विजानाम्.
आयुः प्राणं प्रजां पशुं कीर्तिं द्रविणं ब्रह्मवर्चसम्.
मह्यं दत्त्वा व्रजत ब्रह्मलोकम्.. (१)
वेद का अध्ययन करने वाले अथवा गायत्री का जप करने वाले मैं ने इच्छाओं को पूर्ण
करने वाली, पापों से छुड़ाने वाली एवं वेदों की माता सावित्री की स्तुति की है. ब्राह्मणों को
पवित्र करने वाली सावित्री हमें प्रेरित करे. वह सावित्री देवी मुझे आयु, प्राण, प्रजा, पशु,
कीर्ति और ब्रह्म तेज दे कर ब्रह्म लोक को गमन करे. (१)
सूक्त—७२ देवता—परमात्मा और देव
यस्मात् कोशादुदभराम वेदं तस्मिन्नन्तरव दध्म एनम्.
कृतमिष्टं ब्रह्मणो वीर्येण तेन मा देवास्तपसावतेह.. (१)
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