अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextतुम्हारे पाशों से छूटते हुए हम तुम्हारी सेवा करें तथा कोई हमारी हिंसा न करे. (६९)
प्रास्मत् पाशान् वरुण मुञ्च सर्वान् यैः समामे बध्यते यैर्व्यामे.
अधा जीवेम शरदं शतानि त्वया राजन् गुपिता रक्षमाणाः.. (७०)
हे वरुण! जिन पाशों अर्थात् फंदों से मनुष्य जकड़ जाता है, उन्हें हम से दूर रखो.
तुम्हारे द्वारा रक्षित हुए तथा भविष्य में तुम से रक्षा प्राप्त करते हुए हम सौ वर्ष की आयु प्राप्त
करें. (७०)
अग्नये कव्यवाहनाय स्वधा नमः.. (७१)
कव्य वहन करने वाले अग्नि को स्वधा युक्त हवि प्राप्त हो. हम अग्नि को नमस्कार
करते हैं. (७१)
सोमाय पितृमते स्वधा नमः.. (७२)
श्रेष्ठ पिता वाले अग्नि को स्वधा और नमस्कार है. (७२)
पितृभ्यः सोमवद्भ्यः स्वधा नमः.. (७३)
सोमवान पितरों के लिए स्वधा व नमस्कार है. (७३)
यमाय पितृमते स्वधा नमः.. (७४)
उत्तम पिता वाले यम के लिए स्वधा और नमस्कार है. (७४)
एतत् ते प्रततामह स्वधा ये च त्वामनु.. (७५)
हे प्रपितामह तुम्हारे लिए दिया हुआ यह पदार्थ स्वधा हो. जो तुम्हारे अनुगामी हैं, उन के
लिए भी यह स्वधा हो. (७५)
एतत् ते ततामह स्वधा ये च त्वामनु.. (७६)
हे पितामह! तुम्हारे लिए दिया हुआ यह पदार्थ स्वधा हो. (७६)
एतत् ते तत स्वधा.. (७७)
हे पिता! तुम्हारे लिए यह हवि स्वधा हो. (७७)
स्वधा पितृभ्यः पृथिविषद्व्यः.. (७८)
पृथ्वी पर बैठने वाले पितरों के लिए यह हवि स्वधा हो. (७८)
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