अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextस्वधा पितृभ्यो अन्तरिक्षसद्भ्यः.. (७९)
अंतरिक्ष में स्थित पितरों के लिए यह हवि स्वधा हो. (७९)
स्वधा पितृभ्यो दिविषद्भ्यः.. (८०)
द्युलोक में स्थित पितरों के लिए हवि स्वधा हो. (८०)
नमो वः पितर ऊर्जे नमो वः पितरो रसाय.. (८१)
हे पितरो! तुम्हारे अन्न अथवा बल के लिए नमस्कार है. हे पितरो! तुम्हारे रस और अन्न
के लिए नमस्कार है. (८१)
नमो वः पितरो भामाय नमो वः पितरो मन्यवे.. (८२)
हे पितरो! तुम्हारे क्रोध के लिए नमस्कार है. हे पितरो! तुम्हारे मन्यु अर्थात् आक्रोश के
लिए नमस्कार है. (८२)
नमो वः पितरो यद् घोरं तस्मै नमो वः पितरो यत् क्रूरं तस्मै.. (८३)
हे पितरो! तुम्हारा जो घोर कर्म है, उस के लिए नमस्कार है. हे पितरो! तुम्हारा जो क्रूर
कर्म है उस के लिए नमस्कार है. (८३)
नमो वः पितरो यच्छिवं तस्मै नमो वः पितरो यत् स्योनं तस्मै.. (८४)
हे पितरो! तुम्हारा जो कल्याणमय कर्म है, उस के लिए नमस्कार है. हे पितरो! तुम्हारा
जो सुखमय कर्म है, उस के लिए नमस्कार है. (८४)
नमो वः पितरः स्वधा वः पितरः.. (८५)
हे पितरो! तुम्हारे लिए नमस्कार है. हे पितरो! तुम्हारे लिए स्वधा प्राप्त हो. (८५)
ये ऽ त्र पितरः पितरो ये ऽ त्र यूयं स्थ युष्मांस्ते ऽ नु युयं तेषां श्रेष्ठा
भूयास्थ.. (८६)
ये अन्य पितर यहां हैं. जो पितृगण यहां पर हैं. अन्य पितर तुम्हारे अनुकूल हों. (८६)
य इह पितरो जीवा इह वयं स्मः. अस्मांस्ते ऽ नु वयं तेषां श्रेष्ठा भूयास्म..
(८७)
जो पितर यहां हैं, उन के अनुग्रह से हम यहां जीवित हैं. ये पितर हमारे अनुकूल बने
रहें. हम उन में श्रेष्ठ हैं. हम दोनों मिल कर परस्पर श्रेष्ठ हों. (८७)
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