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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

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आह्वान करते हैं. ज्योतिष्टोम आदि यज्ञों के अवसर पर भी सरस्वती का आह्वान किया जाता
है. वे सरस्वती हवि देने वाले यजमान को वरण करने योग्य पदार्थ प्रदान करें. (४५)
सरस्वतीं पितरो हवन्ते दक्षिणा यज्ञमभिनक्षमाणाः.
आसद्यास्मिन् बर्हिषि मादयध्वमनमीवा इष आ धेह्यस्मे.. (४६)
वेदी के दक्षिण भाग में बैठे हुए पितर भी सरस्वती का आह्वान करते हैं. हे पितरो! तुम
इस यज्ञ में प्रसन्नता प्राप्त करो. हे सरस्वती! तुम पितरों के द्वारा बुलाए जाने पर हमें मन चाहे
अन्न से प्रतिष्ठित करो. (४६)
सरस्वति या सरथं ययाथोक्थैः स्वधाभिर्देवि पितृभिर्मदन्ती.
सहस्रार्घमिडो अत्र भांग रायस्पोषं यजमानाय धेहि.. (४७)
हे सरस्वती! तुम उक्थ, शस्त्र और स्वधा रूप अन्न से तृप्त होती हुई पितरों सहित एक
ही रथ पर बैठ कर आती हो. तुम यजमान को वह अन्न प्रदान करो जो अनेक व्यक्तियों को
तृप्त कर सके. (४७)
पृथिवीं त्वा पृथिव्यामा वेशयामि देवो नो धाता प्र तिरात्यायुः.
परापरैता वसुविद् वो अस्वधा मृताः पितृषु सं भवन्तु.. (४८)
हे मिट्टी से बने हुए मृत पुरुष! मैं तुझे मिट्टी में मिलाता हूं अर्थात् जला कर तेरे शरीर
को राख कर के मिट्टी में मिलाता हूं अथवा तुझे मिट्टी में गाड़ता हूं. धाता देवता यज्ञ का
अनुष्ठान करने वाले हम सब की आयु बढ़ाएं. हे दूर लोक में वास करने वाले पितरो! धाता
देव तुम्हारे लिए निवास स्थान देने वाले हों. तुम पितरों में भलीभांति जा कर मिलो. (४८)
आ प्र च्यवेथामप तन्मृजेथां यद् वामभिभा अत्रोचुः.
अस्मादेतमध्यौ तद् वशीयो दातुः पितृष्विहभोजनौ मम.. (४९)
हे प्रेत का वहन करने वाले बैलो! तुम हमारे सामने ही इस गाड़ी से अलग हो जाओ
तथा प्रेत की सवारी करने से संबंधित निंदा वचनों से छूट जाओ. तुम इस गाड़ी सहित हमारे
पास आओ. तुम्हारा आना शुभ हो. इस पितृमेध यज्ञ में पितरों के लिए हवि देने वाले बनो.
(४९)
एयमगन् दक्षिणा भद्रतो नो अनेन दत्ता सुदुघा वयोधाः.
यौवने जीवानुपपृञ्चती जरा पितृभ्य उपसंपराणयादिमान्.. (५०)
यह संस्कार करने वालों के पास यह गौ रूप दक्षिणा आ रही है. सुंदर फल और दूध
रूपी अन्न को देती हुई यह गौ वृद्धावस्था में भी युवती रहे. संस्कार किए गए पुरुष को यह
पूर्व काल के पितरों के पास पहुंचाए. (५०)
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