Skip to content
SarvaKosh
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 827 of 1063

Read in context
Page 827

एनीः श्येनीः सरूपा विरूपास्तिलवत्सा उप तिष्ठन्तु त्वात्र.. (३३)
हे पुरुष! ये गाएं तेरे लिए कामनाएं पूर्ण करने वाली हों. लाल और श्वेत रंग वाली,
समान और भिन्न रंग वाली तथा अनेक रूपों वाली इन गायों का तिल बछड़ा है. ऐसी गाएं तेरे
निवास स्थान में नित्य तेरे समीप रहें तथा तेरी सेवा करती रहें. (३३)
एनीर्धाना हरिणीः श्येनीरस्य कृष्णा धाना रोहिणीर्धेनवस्ते.
तिलवत्सा ऊर्जमस्मै दुहाना विश्वाहा सन्तवनपस्फुरन्तीः.. (३४)
हे प्रेत! ये हरे रंग वाले धान तेरे लिए लाल श्वेत रंग वाली गाएं बन जाएं. काले धान
लाल रंग की गाएं बनें और तिल उन के बछड़े हों. इस प्रकार की गाएं कभी नष्ट नहीं होतीं. वे
तेरे लिए सदा बल देने वाला दूध देती रहें. (३४)
वैश्वानरे हविरिदं जुहोमि साहसं शतधारमुत्सम्.
स बिभर्ति पितरं पितामहान् प्रपितामहान् बिभर्ति पिन्वमानः.. (३५)
मैं वैश्वानर अग्नि में यह हवि डालता हूं. ये हवि सैकड़ों हजारों धाराओं वाले सोने के
समान हैं. वैश्वानर अग्नि इस हवि से तृप्त हुए हैं. यह अग्नि हमारे पिताओं, पितामहों तथा
प्रपितामहों का पोषण करते हैं. (३५)
सहस्रधारं शतधारमुत्समक्षितं व्यच्यमानं सलिलस्य पृष्ठे.
ऊर्जं दुहानमनपस्फुरन्तमुपासते पितरः स्वधाभिः.. (३६)
पितर सैकड़ों व हजारों धाराओं वाले सोते के समान जो अंतरिक्ष के ऊपर व्याप्त है
तथा अन्न जल को देने वाली है, उस का सेवन स्वधाओं के साथ करते हैं. (३६)
इदं क्साम्बु चयनेन चितं तत् सजाता अव पश्यतेत.
मर्त्यो ऽ यममृतत्वमेति तस्मै गृहान् कृणुतु यावत्सबन्धु.. (३७)
हे समान गोत्र वालो! इस एकत्र आस्था समूह को ध्यान से देखो. यह प्रेत अमरत्व को
प्राप्त हो रहा है. तुम सब इस के लिए घर का निर्माण करो. (३७)
इहैवैधि धनसनिरिहचित्त इहक्रतुः. इहैधि वीर्यवत्तरो वयोधा अपराहतः..
(३८)
हे मनुष्य! तू यहीं पर वृद्धि प्राप्त कर. तू यहीं पर ज्ञानवान हुआ है. तू यहीं कर्म करता
हुआ हमें धन प्रदान कर. तू यहीं पर अतिशय बलवान बना तथा शत्रुओं से पराजित नहीं
हुआ. तू अन्न को धारण करने वाला एवं दीर्घ आयु वाला हो कर वृद्धि प्राप्त कर. (३८)
पुत्रं पौत्रमभितर्पयन्तीरापो मधुमतीरिमाः.
ebook converter DEMO Watermarks*