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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

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Page 730

बृहस्पति द्वारा विरचित इस ओषधि को विश्वे देवों ने धारण किया था. जो भग गायों में
प्रवेश कर चुका है, हम इस ओषधि को उस भग से संपन्न करते हैं. (५५)
बृहस्पतिनावसृष्टां विश्वे देवा अधारयन्.
यशो गोषु प्रविष्टं यत् तेनेमां सं सृजामसि.. (५६)
बृहस्पति देव द्वारा इस ओषधि का सृजन हुआ है. गायों में जो यज्ञ प्रवेश कर गया है, मैं
उस यज्ञ से इसे संयुक्त करता हूं. (५६)
बृहस्पतिनावसृष्टां विश्वे देवा अधारयन्.
पयो गोषु प्रविष्टं यत् तेनेमां सं सृजामसि.. (५७)
बृहस्पति द्वारा यह ओषधि विश्वे देवों के हेतु पुष्ट हुई है. गायों में जो दूध स्थित है, हम
इस ओषधि को उस से संयुक्त करते हैं. (५७)
बृहस्पतिनावसृष्टां विश्वे देवा अधारयन्.
रसो गोषु प्रविष्टो यस्तेनेमां सं सृजामसि.. (५८)
बृहस्पति के द्वारा निर्मित इस ओषधि को सभी देवों ने पुष्ट किया है. गायों में जो रस
प्रविष्ट है, हम उस रस से इस ओषधि को संयुक्त करते हैं. (५८)
यदीमे केशिनो जना गृहे ते समनर्तिषू रोदेन कृण्वन्तो ३ घम्.
अग्निष्ट्वा तस्मादेनसः सविता च प्र मुञ्चताम्.. (५९)
लंबे केशों वाले ये लोग तेरे घर में नाचते रहे हैं तथा रोके से पाप करते रहे हैं, अग्नि देव
तुझे उस पाप से मुक्त कराएं. (५९)
यदीयं दुहिता तव विकेश्यरुदद् गृहे रोदेन कृण्वत्य् १ घम्.
अग्निष्ट्वा तस्मादेनसः सविता च प्र मुञ्चताम्.. (६०)
तेरी पुत्री अपने केशों को फैला कर रोती रही है, तेरे घर में हुए इस पाप से सविता और
अग्नि तुझे छुड़ाएं. (६०)
यज्जामयो यद्युवतयो गृहे ते समनर्तिषू रोदेन कृणवतीरघम्.
अग्निष्ट्वा तस्मादेनसः सविता च प्र मुञ्चताम्.. (६१)
तेरी बहन तथा अन्य स्त्रियां दुःखी हुईं और रोती हुई तेरे घर में घूमती रही हैं. सविता
और अग्नि तुझे उस पाप से मुक्त करें. (६१)
यत् ते प्रजायां पशुषु यद्वा गृहेषु निष्ठितमघकृद्भिर्घं कृतम्.
अग्निष्ट्वा तस्मादेनसः सविता च प्र मुञ्चताम्.. (६२)
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