अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextपहले चटाई फैला दो. इस के बाद मृगचर्म के ऊपर उत्तम प्रजा उत्पन्न करने वाली यह
स्त्री अग्नि की उपासना करे. (२३)
आ रोह चर्मोप सीदाग्निमेष देवो हन्ति रक्षांसि सर्वा.
इह प्रजां जनय पतये अस्मै सुज्यैष्ठ्यो भवत् पुत्रस्त एष:.. (२४)
हे स्त्री! तू इस मृगचर्म पर चढ़ कर अग्नि देव के पास बैठ. ये देवता सभी राक्षसों को
मारने में समर्थ हैं. तू इस घर में अपनी प्रथम संतान को उत्पन्न कर. यह तेरा ज्येष्ठ पुत्र
कहलाएगा. (२४)
वि तिष्ठन्तां मातुरस्या उपस्थान्नानारूपाः पशवो जायमानाः.
सुमङ्गल्युप सीदेममग्निं संपत्नी प्रति भूषेह देवान्.. (२५)
इस माता से अनेक पुत्र प्रकट हो कर इस की गोद में बैठें. हे सुंदर कल्याण वाली स्त्री!
तू अग्नि के पास बैठ कर इन सब देवताओं को सुशोभित कर. (२५)
सुमङ्गली प्रतरणी गृहाणां सुशेवा पत्ये श्वशुराय शंभूः.
स्योना श्वश्र्वै प्र गृहान् विशेमान्.. (२६)
तू कल्याणकारी, पति को सुख देने वाली, घर का काम करने वाली ससुर और सास के
लिए सुखकारिणी होती हुई घर में प्रवेश कर. (२६)
स्योना भव श्वशुरेभ्यः स्योना पत्ये गृहेभ्यः.
स्योनास्यै सर्वस्यै विशे स्योना पुष्टायैषां भव.. (२७)
तू पति को सुख देने वाली तथा घर के लिए मंगलमयी हो. तू श्वसुर का कल्याण करने
वाली तथा संतानों को सुख देती हुई उन का पालन पोषण कर. (२७)
सुमङ्गलीरियं वधूरिमां समेत पश्यत.
सौभाग्यमस्मै दत्त्वा दौर्भाग्येर्विपरेतन.. (२८)
यह वधू कल्याणमयी है. सब मिल कर इसे देखो. तुम सब इस के दुर्भाग्य को दूर करते
हुए इसे भाग्य प्रदान करो. (२८)
या दुर्हार्दो युवतयो याश्चेह जरतीरपि.
वर्चो न्व १ स्यै सं दत्ताथास्तं विपरेतन.. (२९)
जो स्त्रियां दूषित हृदय वाली तथा वृद्धाएं हों, वे इसे तेज प्रदान करती हुई यहां से चली
जाएं. (२९)
रुक्मप्रस्तरणं वह्यं विश्वा रूपाणि बिभ्रतम्.
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