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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

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आनन्दा मोदाः प्रमुदो ऽ भीमोदमुदश्च ये.
हसो नरिष्टा नृत्तानि शरीरमनु प्राविशन्.. (२४)
आनंद, मोद, प्रमोद, सामने वर्तमान मोद अर्थात् अभिमोद, हंसी, शब्द, रूप, स्पर्श
आदि एवं नृत्य आदि ने इस शरीर में प्रवेश किया. (२४)
आलापाश्च प्रलापाश्चाभीलापलपञ्च ये.
शरीरं सर्वे प्राविशन्नायुजः प्रयजो युजः.. (२५)
सार्थक वचन, निरर्थक वचन, अभिलाषाओं से पूर्ण वचन, आयोजन, प्रयोजन और
योजना—इन सब ने मनुष्य के शरीर में प्रवेश किया. (२५)
प्राणापानौ चक्षुः श्रोत्रमक्षितिश्च क्षितिश्च या.
व्यानोदानौ वाङ् मनः शरीरेण त ईयन्ते.. (२६)
प्राण और अपान वायुएं, नेत्र, कान, विनाश का अभाव और विनाश, व्यान और उदान
वायुएं, वाणी और मन—ये सभी इस शरीर में प्रवेश कर के अपने-अपने काम लगे हैं. (२६)
आशिषश्च प्रशिषश्च संशिषो विशिषश्च याः.
चित्तानि सर्वे संकल्पाः शरीरमनु प्राविशन्.. (२७)
मनचाहे फल की प्रार्थनाएं, उत्कृष्ट प्रार्थनाएं, भलीभांति होने वाली प्रार्थनाएं तथा अनेक
प्रकार की प्रार्थनाएं, मनबुद्धि और अहंकार, सभी संकल्प—इन्होंने पुरुष शरीर में प्रवेश
किया. (२७)
आस्तेयीश्च वास्तेयीश्च त्वरणाः कृपणीश्च याः.
गुह्याः शुक्रा स्थूला अपस्ता बीभत्सावसादयन्.. (२८)
भलीभांति स्नान, स्नान से संबंधित जल, शीघ्रता से चलने वाले तथा थोड़ी मात्रा में होने
वाले जल, गुफा में होने वाले, श्वेत वर्ण के अर्थात् स्वच्छ जल, अधिक मात्रा में होने वाले नदी
रूप में वर्तमान जल—इन सब ने पुरुष के शरीर में प्रवेश किया. (२८)
अस्थि कृत्वा समिधं तदष्टापो असादयन्.
रेतः कृत्वाज्यं देवाः पुरुषमाविशन्.. (२९)
हड्डियों को समिधा बना कर पहले कहे गए आठ प्रकार के जलों ने पुरुष के शरीर में
प्रवेश किया. वीर्य को घृत बना कर देवों ने पुरुष के शरीर में प्रवेश किया. (२९)
या आपो याश्च देवता या विराड् ब्रह्मणा सह.
शरीरं ब्रह्म प्राविशच्छरीरे ऽ धि प्रजापतिः.. (३०)
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