अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextकर के सृष्टि रचना करने वाले ब्रह्म ने उस शरीर में आत्मा के रूप में प्रवेश किया. (११)
कुतः केशान् कुतः स्नाव कुतो अस्थीन्याभरत्.
अङ्गा पर्वाणि मज्जानं को मांसं कुत आभरत्.. (१२)
सृष्टि रचना करने वाले ईश्वर ने केशों, स्नायुओं अर्थात् नसों को और हड्डियों को किस
उपादान कारण से बनाया, अंगों, जोड़ों, चरबी और मांस की रचना उस ने कहां से की? (१२)
संसिचो नाम ते देवा ये संभारान्तसमभरन्.
सर्वं संसिच्य मर्त्यं देवाः पुरुषमाविशन्.. (१३)
ज्ञानेंद्रियां, कर्मेंद्रियों एवं प्राण, अपान आदि के रूप में जिन साधनों को पहले बताया
गया है, उन्हें सृष्टि रचना करने वाले ब्रह्म ने एकत्र किया. उन साधनों से बने शरीर को रक्त,
मज्जा आदि से गीला कर के उन देवों ने मरण धर्मा पुरुष का निर्माण कर के आत्मा के रूप
में उस में प्रवेश किया. (१३)
ऊरू पादावष्ठीवन्तौ शिरो हस्तावथो मुखम्.
पृष्टीर्बर्जब्ये पार्श्वे कस्तत् समदधादृषिः.. (१४)
जंघाओं को, पैरों को, घुटनों को, शीश को, हाथों को और मुख को, पसलियों को किस
ऋषि ने बनाया. (१४)
शिरो हस्तावथो मुखं जिह्वां ग्रीवाश्च कीकसाः.
त्वचा प्रावृत्य सर्वं तत् संधा समदधान्मही.. (१५)
शीश को, दोनों हाथों को, मुख को, जीभ को, गरदन को, हड्डियों को एवं उस सारे
शरीर को त्वचा से ढक कर इस के निर्माण कर्ता देवता ने आपस में जोड़ दिया. (१५)
यत्तच्छरीरमशयत् संधया संहितं महत्.
येनेदमद्य रोचते को अस्मिन् वर्णमाभरत्.. (१६)
इस प्रकार के शरीर का निर्माण करने वाले देवता सहित जो बढ़ा हुआ शरीर है, वह इस
समय जिस रंग के कारण सुंदर लगता है, उस शरीर में किस नाम के देव ने उस रंग को
बनाया है? (१६)
सर्वे देवा उपाशिक्षन् तदजानाद् वधूः सती.
ईशा वशस्य या जाया सास्मिन् वर्णमाभरत्.. (१७)
सभी देवों ने समीप में शक्तिशाली होने की इच्छा की. परमेश्वर के साथ विवाह करने
वाली माया ने देवों के द्वारा बनाए हुए उस शरीर को जाना. जो माया सारे संसार का नियंत्रण
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