अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextसृष्टि रचना के समय वसंत आदि ऋतुएं उत्पन्न नहीं हुई थीं. धाता, बृहस्पति, इंद्र, अग्नि
तथा दो अश्विनीकुमार भी उस समय उत्पन्न नहीं हुए थे. धाता आदि वे देव अपने जन्मदाता
ब्रह्म की उपासना कर रहे थे. (५)
तपश्चैवास्तां कर्म चान्तर्महत्यर्णवे.
तपो ह जज्ञे कर्मणस्तत् ते ज्येष्ठमुपासत.. (६)
प्रलय काल के महासागर में तप और कर्म ही थे. तप कर्म से उत्पन्न हुआ था. वे धाता
आदि सृष्टि के कारण बने हुए ब्रह्म की उपासना कर रहे थे. (६)
येत आसीद् भूमिः पूर्वा यामद्धात्तय इद् विदुः.
यो वै तां विद्यान्नामथा स मन्येत पुराणवित्.. (७)
सामने वर्तमान इस भूमि से पहले जो भूमि थी. उसे तप के प्रभाव से शक्ति प्राप्त करने
वाले ऋषि जानते थे. जो अतीत काल के कल्प में स्थित उस भूमि को जो जानेगा, वह
प्राचीन अर्थ को जानने वाला माना जाएगा. (७)
कुत इन्द्रः कुतः सोमः कुतो अग्निरजायत.
कुतस्त्वष्टा समभवत् कुतो धाताजायत.. (८)
कहां से इंद्र, कहां से सोम और कहां से अग्नि उत्पन्न हुई? त्वष्टा कहां से उत्पन्न हुआ
तथा धाता की उत्पत्ति कहां से हुई? (८)
इन्द्रादिन्द्रः सोमात् सोमो अग्नेरग्निरजायत.
त्वष्टा ह जज्ञे त्वष्टुर्धातुर्धाताजायत.. (९)
पूर्व काल में जो इंद्र थे, उन से इन वर्तमान काल के इंद्र की उत्पत्ति हुई. इसी सोम से
सोम, अग्नि से अग्नि, त्वष्टा से त्वष्टा और धाता से धाता उत्पन्न हुए. (९)
ये त आसन् दश जाता देवा देवेभ्यः पुरा.
पुत्रेभ्यो लोकं दत्त्वा कस्मिंस्ते लोक आसते.. (१०)
प्राचीन काल में देवों से जो दस देव उत्पन्न हुए, वे अपने पुत्रों को यह लोक दे कर भी
स्वयं किस लोक में निवास करते हैं? (१०)
यदा केशानस्थि स्नाव मांसं मज्जानमाभरत्.
शरीरं कृत्वा पादवत् कं लोकमनुप्राविशत्.. (११)
जिस सृष्टि रचना के समय रचना करने वाले ने केशों को, अस्थियों को, स्नायुओं अर्थात्
नसों को, मांस को और मज्जा अर्थात् चरबी को एकत्र किया. हाथपैरों वाले शरीर की रचना
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