अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextजो सर्प यहां से समीप रहते हैं और जो दूर रहते हैं, वे विषहीन हो जाएं. मैं बिच्छू को
हथौड़ा से मारता हूं और सांप को डंडे से मारता हूं. (९)
अघाश्वस्येदं भेषजमुभयोः स्वजस्य च.
इन्द्रो मे ऽ हिमघायन्तमहिं पैद्वो अरन्धयत्.. (१०)
मेरे पास जो जड़ीबूटियां हैं, वे अघाश्व और स्वज दोनों प्रकार के सर्पों का विष दूर करने
वाली हैं. हिंसा रूपी पाप करने वाले सांप को रोकने के हेतु इंद्र ने पैद्व को मेरे वश में किया
है. (१०)
पैद्वस्य मन्महे वयं स्थिरस्य स्थिरधाम्नः.
इमे पश्चा पृदाकवः प्रदीध्यत आसते.. (११)
स्थिर एवं स्थायी तेज वाले पैद्व को हम मानते हैं. ये पश्च और पृदाकू नामक सर्पों को
शोकमग्न करते हैं. (११)
नष्टासवो नष्टविषा हता इन्द्रेण वज्रिणा. जघानेन्द्रो जघ्निमा वयम्.. (१२)
वज्रधारी इंद्र ने उन सर्पों के प्राण एवं विष को समाप्त कर दिया था, जिन्हें इंद्र ने मारा
था. हम उन का विनाश करते हैं. (१२)
हतास्तिरश्चिराजयो निपिष्टासः पृदाकवः.
दर्विं करिक्रतं श्वित्रं दर्भेष्वसितं जहि.. (१३)
तिरश्चिराजी सांप मार दिए गए हैं और पृदाकू नामक सांप पीस डाले गए हैं. हे दर्वी! तू
दर्भों पर पड़े हुए सफेद और काले करिकृत सांपों का विनाश कर दे. (१३)
कैरातिका कुमारिका सका खनति भेषजम्.
हिरण्ययीभिरभ्रिभिर्गिरीणामुप सानुषु.. (१४)
किरात जाति की कुमारी कुदाल से सर्पों की ओषधि खोजती है. वह पर्वतों की चोटियों
पर सोने के फावड़ों से ओषधि खोदती है. (१४)
आयमगन् युवा भिषक् पृश्निहापराजितः.
स वै स्वजस्य जम्भन उभयोर्वृश्चिकस्य च.. (१५)
कभी पराजित न होने वाला युवा वैद्य मंत्र शक्ति से संपन्न है. यह स्वज नामक सर्प और
बिच्छू का विनाश कर सकता है. (१५)
इन्द्रो मे ऽ हिमरन्धयन्मित्रश्च वरुणश्च. वातापर्जन्यो ३ भा.. (१६)
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