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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

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हे कामदेव! देवों ने जिस प्रकार असुरों को भगाया था तथा इंद्र ने दैत्यों को घोर
अंधकार में धकेल कर संताप दिया था, उसी प्रकार तुम मेरे शत्रुओं को इस लोक से दूर भगा
दो. (१८)
कामो जज्ञे प्रथमो नैनं देवा आपुः पितरो न मर्त्याः.
ततस्त्वमसि ज्यायान् विश्वहा महांस्तस्मै ते काम नम इत् कृणोमि.. (१९)
कामदेव सर्वप्रथम उत्पन्न हुआ. देव, पितर और मनुष्य कोई भी उस की समानता नहीं
कर सकता. इस कारण तुम सभी से ज्येष्ठ और समस्त विश्व में महान हो. मैं तुम्हारे लिए
नमस्कार करता हूं. (१९)
यावती द्यावापृथिवी वरिम्णा यावदापः सिष्यदुर्यावदग्निः.
ततस्त्वमसि ज्यायान् विश्वहा महांस्तस्मै ते काम नम इत् कृणोमि.. (२०)
हे कामदेव! द्यावा, पृथ्‍वी का जितना विस्तार है, जल और अग्नि जितने विस्तृत हैं, तुम
उन से कहीं अधिक विस्तृत हो, इसीलिए तुम सभी से ज्येष्ठ हो और समस्त विश्व में व्याप्त
हो. मैं तुम्हारे लिए नमस्कार करता हूं. (२०)
यावतीर्दिशः प्रदिशो विषूचीर्यावतीराशा अभिचक्षणा दिवः.
ततस्त्वमसि ज्यायान् विश्वहा महांस्तस्मै ते काम नम इत् कृणोमि.. (२१)
हे कामदेव! दिशाएं और प्रदिशाएं जितनी विस्तृत हैं और स्वर्ग की जितनी दिशाएं
बताई गई हैं, तुम उन सभी से ज्येष्ठ हो और समस्त विश्व में व्याप्त हो. मैं तुम को नमस्कार
करता हूं. (२१)
यावतीर्भृङ्गा जत्वः कुरूरवो यावतीर्वघा वृक्षसर्प्यो बभूवुः.
ततस्त्वमसि ज्यायान् विश्वहा महांस्तस्मै ते काम नम इत् कृणोमि.. (२२)
हे कामदेव! भृंग, जतु, कर, वृक्ष एवं सर्प जितने विशाल हैं, तुम उन सभी से महान हो.
तुम सभी में व्यस्त हो. मैं तुम को नमस्कार करता हूं. (२२)
ज्यायान् निमिषतो ऽ सि तिष्ठतो ज्यायान्तसमुद्रादसि काम मन्यो.
ततस्त्वमसि ज्यायान् विश्वहा महांस्तस्मै ते काम नम इत् कृणोमि.. (२३)
हे कामदेव! हे मन्यु! पलक झपकाने वाले एवं स्थित रहने वाले प्राणियों तथा समुद्र से
भी तुम महान हो. तुम सारे विश्व में व्याप्त हो. मैं तुम को नमस्कार करता हूं. (२३)
न वै वातश्चन काममाप्नोति नाग्निः सूर्यो नोत चन्द्रमाः.
ततस्त्वमसि ज्यायान् विश्वहा महांस्तस्मै ते काम नम इत् कृणोमि.. (२४)
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