Skip to content
SarvaKosh
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 235 of 1063

Read in context
Page 235

क्या करोगे? (७)
उरुगूलाया दुहिता जाता दास्यसिक्न्या.
प्रतङ्कं दुद्रुषीणां सर्वासामरसं विषम्.. (८)
जो सांपिन गूलर नाम के विशाल वृक्ष से उत्पन्न हुई है, वह काली सांपिन की दासी है.
जो सांपिन दांतों के माध्यम से अपना क्रोध प्रकट करती है, इस का विष हमें दुःख प्रदान
करता है यह विष प्रभावहीन हो जाए. (८)
कर्णा श्वावित् तदब्रवीद् गिरेरवचरन्तिका.
याः काश्चेमाः खनित्रिमास्तासामरसतं विषम्.. (९)
पर्वतों पर घूमने वाली और कांटों वाली ने कहा कि जो सांपिनें धरती में बिल बना कर
निवास करती हैं, उन का विष प्रभावहीन हो जाए. (९)
ताबुवं न ताबुवं न घेत् त्वमसि ताबुवम्.
ताबुवेनारसं विषम्.. (१०)
तुम ताबुव नहीं हो, तुम ताबुव नहीं हो, क्योंकि ताबुव विष को प्रभावहीन कर देता है.
(१०)
तस्तुवं न तस्तुवं न घेत् त्वमसि तस्तुवम्.
तस्तुवेनारसं विषम्.. (११)
तुम तस्तुव नहीं हो, तुम तस्तुव नहीं हो. निश्चित रूप से तुम तस्तुव नहीं हो. तस्तुव विष
को प्रभावहीन कर देता है. (११)
सूक्त-१४ देवता—ओषधि
सुपर्णस्त्वान्वविन्दत् सूकरस्त्वाखनन्नसा.
दिप्सौषधे त्वं दिप्सन्तमव कृत्याकृतं जहि.. (१)
हे ओषधि! सुपर्ण अर्थात् गरुड़ या सूर्य ने तुम्हें प्राप्त किया था. सुअर ने अपनी नाक से
तुम्हें खोदा था. हे कृत्या से संबंधित ओषधि! तुम कृत्या का प्रयोग करने वाले और हमें मारने
का प्रयत्न करने वाले का नाश करो. (१)
अव जहि यातुधानानव कृत्याकृतं जहि.
अथो यो अस्मान् दिप्सति तमु त्वं जह्योषधे.. (२)
हे ओषधि! तुम याततुधानों अर्थात् राक्षसों और कृत्या का निर्माण करने वाले का