अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextतानु ते सर्वाननुसंदिशामि.. (९)
हे अमुक शत्रु, अमुक गोत्र वाले एवं अमुक के पुत्र, मैं तुझे वरुण के इन सभी पाशों से
बांधता हूं. (९)
सूक्त-१७ देवता—अपामार्ग, वनस्पति
ईशानां त्वा भेषजानामुज्जेष आरभामहे.
चक्रे सहस्रवीर्य सर्वस्मा ओषधे त्वा.. (१)
हे सहदेवी! तू जड़ीबूटियों की स्वामिनी है. मैं शत्रु द्वारा किए गए अभिचार के दोष को
शांत करने के लिए तेरा स्पर्श करता हूं. मैं अभिचार से उत्पन्न दोषों को दूर करने के लिए तुझे
सामर्थ्य वाली बनाता हूं. (१)
सत्यजितं शपथयावनीं सहमानां पुनःसराम्.
सर्वाः समह्व्योषधीरिरतो नः पारयादिति.. (२)
वास्तव में अभिचार आदि दोषों को दूर करने वाली सत्यजित, दूसरे के आक्रोश को
मिटाने वाली शपथ योगिनी, सब को पराजित करने वाली सहमाना, बारबार व्याधि का
विनाश करने वाली पुनःसरा नामक जड़ीबूटी को अन्य जड़ीबूटियां अभिचार दोष का नाश
करने के लिए प्राप्त होती हैं. (२)
या शशाप शपनेन याघं मूरमादधे.
या रसस्य हरणाय जातमारेभे तोकमत्तु सा.. (३)
जिस पिशाची ने आक्रोश में भर कर हमें शाप दिया है, जिस ने मूर्च्छा प्रदान करने वाला
पाप हमारी ओर भेजा है और जो शरीर के रक्त आदि का हरण करने के लिए मेरे पुत्र आदि
का आलिंगन करती है, वह मेरे ऊपर अभिचार करने वाले शत्रु के पुत्र को खा जाए. (३)
यां ते चक्रुराम पात्रे यां चक्रुर्नीललोहिते.
आमे मांसे कृत्यां यां चक्रुस्तया कृत्याकृतो जहि.. (४)
हे कृत्या नाम की राक्षसी! अभिचार करने वालों ने तुझे मिट्टी के बिना पके पात्र में
धुआं उगलती हुई नीली और लाल ज्वालाओं वाली अग्नियों में तथा बिना पके मांस में
अभिमंत्रित किया है, तू उन का विनाश कर. (४)
दौष्वप्न्यं दौर्जीवित्यं रक्षो अभ्वमराय्यः.
दुर्णीम्नीः सर्वा दुर्वाचस्ता अस्मन्नाशयामसि.. (५)
हम अभिचार द्वारा सताए हुए इस पुरुष से बुरे स्वप्न संबंधी भय को, दुष्ट जीवन वाले
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