अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextलोगों संबंधी भय को, राक्षसों संबंधी भय को और महान अभिचार से उत्पन्न भय के कारण
को नष्ट करते हैं. दरिद्रता के कारण पाप लक्ष्मियां, छेदिका, भेदिका आदि दुष्ट नामों वाली जो
पिशाचियां हैं, मैं उन्हें भी इस के शरीर से दूर भगाता हूं. (५)
क्षुधामारं तृष्णामारमगोतामनपत्यताम्.
अपामार्ग त्वया वयं सर्वं तदप मृज्महे.. (६)
हे अपामार्ग! हम तेरी सहायता से भूख की पीड़ा से पुरुष को मारने वाले एवं प्यास की
अधिकता से पुरुष की मृत्यु करने वाले अभिचार का विनाश करते हैं. हम तेरी सहायता से
गायों के अभाव को और संतानहीनता को भी समाप्त करते हैं. (६)
तृष्णामारं क्षुधामारमथो अक्षपराजयम्.
अपामार्ग त्वया वयं सर्वं तदप मृज्महे.. (७)
हे अपामार्ग! हम तेरी सहायता से प्यास की पीड़ा से पुरुष को मारने वाले, भूख की
पीड़ा से पुरुष को मारने वाले अभिचार एवं जुए में पराजय को दूर भगाना चाहते हैं. (७)
अपामार्ग ओषधीनां सर्वासानेक इद वशी.
तेन ते मृज्म आस्थितमथ त्वमगदश्वर.. (८)
हे अभिचार के दोष से गृहीत पुरुष! एकमात्र अपामार्ग ही सब जड़ीबूटियों को वश में
करने वाला है. हम अपामार्ग की सहायता से तुझ में अभिचार द्वारा उत्पन्न रोग आदि को दूर
करते हैं. इस के पश्चात तू रोग रहित हो कर विचरण कर. (८)
सूक्त-१८ देवता—अपामार्ग, वनस्पति
समं ज्योतिः सूर्येणाह्ना रात्री समावती.
कृणोमि सत्यमूतये ऽ रसाः सन्तु कृत्वरीः.. (१)
सूर्य से उस का ज्योतिर्मंडल कभी अलग नहीं होता. रात्रि दिन के समान विस्तार वाली
होती है, उसी प्रकार मैं यथार्थ कर्म करता हूं. मैं अभिचार से पीड़ित पुरुष की रक्षा के लिए
विनाश करने वाली कृत्याओं को कार्य करने में असमर्थ बनाता हूं. (१)
यो देवाः कृत्यां कृत्वा हरादविदुषो गृहम्.
वत्सो धारुरिव मातरं तं प्रत्यगुप पद्यताम्.. (२)
हे देवो! जो मनुष्य मंत्रों और ओषधि के द्वारा पीड़ा पहुंचाने वाली कृत्या के निर्माण हेतु
उस के घर जाता है. जिस प्रकार बछड़ा गाय के पीछेपीछे जाता है, उसी प्रकार वह कृत्या
अभिचार करने वाले पुरुष के समीप जाए. (२)
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