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अनुरागसागर वाणी

अनुरागसागर वाणी

Anuragsagar Vani

by स्वामी मधु परमहंस जी

Source: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (origin)

Devanagarihipublished144 pages

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साहिब बन्दगी

सुपच सुदर्शन को लै आवो । आदर मान सहित जिमावो ॥
सोई साधु और न कोई । पूरन यज्ञ जाहि ते होई ॥

पाण्डवों ने कहा कि कई साधुओं को भोजन करवाया गया, आपने भी किया और कह रहे हो कि कोई साधु भोजन नहीं किया, अब साधु कहाँ से पाएँ! तब कृष्ण जी ने कहा कि सुपच सुदर्शन के अलावा कोई सच्चा साधु नहीं है, यदि उसे आदर सहित बुलाकर भोजन करवाओ तो तुम्हारा यज्ञ सफल होगा। तब उसे लाया गया और उसे भोजन खिलाया गया।

सुपच भक्त ग्रास उठावा । बाजो घण्ट नाम परभावा ॥
भूप भवन भोजन कर जबहीं । बजा अकाश में घण्टा तबहीं ॥

तब सुपच ने भोजन खाया तो आकाश में घण्टा बजा और यज्ञ सफल हुआ।

....निरंजन को दिये वचनानुसार साहिब ने तीन युग तक थोड़े-2 जीव अमर लोक पहुँचाए, पर कलयुग में उनके लाखों शिष्य हुए।

तीन लोक से बाहर देश। तेहि साहिब का सुनो संदेश॥
तेहि साहब की मोहि साहिदानी। तिनकी आदि कृष्ण नहि जानी॥