Skip to content
SarvaKosh
अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

Akbar Birbal Vinod (Stories of Justice, Wit and Humour)

by पारम्परिक लोक संग्रह

Source: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (origin)

DevanagariHindipublished292 pages

Page 151 of 292

Read in context
Page 151

१३७ अकबर बीरबल विनोद

उसकी युक्ति से बादशाह भी सहमत हो गया और उसे
तत्क्षण कार्यान्वित करने के लिये बीरबल को आज्ञा दी।
बीरबल का कार्यारम्भ हुआ।
वह बहुतेरे वैद्यहकीमों को बुलावा भेजा, जब वे आये तो उन
से पूछा-“आपको जड़ी बूटियों का हाल भलीभाँति मालूम है—
यदि न भी मालूम हो तो एक हफ्ते में छानबीन कर बतलावें
कि आशापल्लव की पत्तियाँ और उसकी जड़ किन-किन
दवाओं में काम आती है?” बीरबल की आज्ञा मानकर सब
वैद्य लौट गये और घर पहुँचकर उसके अनुसन्धान में
यथासक्य कोशिश करने लगे।
जब सप्ताह का अन्तिम दिन आया तो अपनी-अपनी
सम्मति देने के लिये दर्बार में उपस्थित हुए। सभी ने अपनी
खोज का पृथक २ वर्णन किया; परन्तु बीरबल के मतलब की
बात किसीने नहीं बतलाई। तब उनमें से एक सर्वश्रेष्ठ वैद्य
बोला-“दीवानजी! आपकी आज्ञानुसार मैंने भी अपने भरसक
अनुसन्धान किया है। बड़ी खोजबीन के पश्चात् मुझे निघण्टु
से एक बात मिली है। सुश्रुत और निघण्टु में लिखा है कि
आशापल्लव के पत्ते का चूर्ण बना कर देने से पीलिया रोग
वाले को तत्काल आरोग्य-लाभ होता है और जलन्धर वाले
रोगी को इसकी जड़ की धूनी देने से जलन्धर का रोग जड़
से जाता रहता है।”
बीरबल ने पूछा-“क्या आप बतला सकते हैं कि इस
महीने के अन्तर्गत कितने लोग जलन्धर के रोग से ग्रसित
हुए थे और उससे बचने के लिये उन रोगियों ने किन-किन