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सर्वकोश
१०८ उपनिषद् (ज्ञान खण्ड - भाग २)

१०८ उपनिषद् (ज्ञान खण्ड - भाग २)

108 Upanishads Part 2 - Gyan Khand

पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished505 पृष्ठ

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पृष्ठ 14

१४ | भूमिका |
(गायत्र्युपनिषद्-शतपथ ब्राह्मणांतर्गत) \hspace{1.5cm} २. देव्युपनिषद् (शिवरहस्यांतर्गत-अनुपलब्ध)
(५७) गायत्री रहस्योपनिषद् \hspace{2cm} (९०) द्वयोपनिषद्
(५८) गरुडोपनिषद् (वाक्यात्मक एवं मन्त्रात्मक) \hspace{0.5cm} (९१) ध्यानबिन्दूपनिषद्
(५९) गुह्यकाल्युपनिषद् \hspace{2.5cm} (९२) नादबिन्दूपनिषद्
(६०) गुह्यषोढान्यासोपनिषद् \hspace{1.8cm} (९३) नारदपरिव्राजकोपनिषद्
(६१) गोपालपूर्वतापिन्युपनिषद् \hspace{1.7cm} (९४) नारदोपनिषद्
(६२) गोपालोत्तरतापिन्युपनिषद् \hspace{1.5cm} (९५) नारायणपूर्वतापिन्युपनिषद्
(६३) गोपीचन्दनापनिषद् \hspace{2.3cm} (९६) नारायणोत्तरतापिन्युपनिषद्
(६४) चतुर्वेदोपनिषद् \hspace{2.7cm} (९७) नारायणोपनिषद् (नारायणाथर्वशीर्ष)
(६५) चाक्षुषोपनिषद् (चक्षुरुपनिषद्, \hspace{1.5cm} (९८) निरालम्बोपनिषद्
\hspace{0.8cm} चक्षूरोगोपनिषद्, नेत्रोपनिषद्) \hspace{1.2cm} (९९) निरुक्तोपनिषद्
(६६) चित्यूपनिषद् \hspace{3cm} (१००) निर्वाणोपनिषद्
(६७) छागलेयोपनिषद् \hspace{2.4cm} (१०१) नीलरुद्रोपनिषद्
(६८) छान्दोग्योपनिषद् \hspace{2.4cm} (१०२) नृसिंहपूर्वतापिन्युपनिषद्
(६९) जाबालदर्शनोपनिषद् \hspace{2cm} (१०३) नृसिंहषट्चक्रोपनिषद्
(७०) जाबालोपनिषद् \hspace{2.6cm} (१०४) नृसिंहोत्तरतापिन्युपनिषद्
(७१) जाबाल्युपनिषद् \hspace{2.7cm} (१०५) पञ्चब्रह्मोपनिषद्
(७२) तारसारोपनिषद् \hspace{2.6cm} (१०६) परब्रह्मोपनिषद्
(७३) तारोपनिषद् \hspace{3.2cm} (१०७) परमहंस परिव्राजकोपनिषद्
(७४) तुरीयातीतोपनिषद्(तीतावधूतोपनिषद्) \hspace{0.5cm} (१०८) परमहंसोपनिषद्
(७५) तुरीयोपनिषद् \hspace{3cm} (१०९) परमात्मिकोपनिषद्
(७६) तुलस्युपनिषद् \hspace{3cm} (११०) पारायणोपनिषद्
(७७) तेजोबिन्दूपनिषद् \hspace{2.6cm} (१११) पाशुपतब्रह्मोपनिषद्
(७८) तैत्तिरीयोपनिषद् \hspace{2.7cm} (११२) पिण्डोपनिषद्
(७९) त्रिपाद्विभूतिमहानारायणोपनिषद् \hspace{1.3cm} (११३) पीताम्बरोपनिषद्
(८०) त्रिपुरातापिन्युपनिषद् \hspace{2.3cm} (११४) पुरुषसूक्तोपनिषद्
(८१) त्रिपुरोपनिषद् \hspace{3cm} (११५) पैङ्गलोपनिषद्
(८२) त्रिपुरामहोपनिषद् \hspace{2.4cm} (११६) प्रणवोपनिषद् (पद्यात्मक)
(८३) त्रिशिखिब्राह्मणोपनिषद् \hspace{1.8cm} (११७) प्रणवोपनिषद् (वाक्यात्मक)
(८४) त्रिसुपर्णोपनिषद् \hspace{2.6cm} (११८) प्रश्नोपनिषद्
(८५) दक्षिणामूर्त्युपनिषद् \hspace{2.3cm} (११९) प्राणाग्निहोत्रोपनिषद्
(८६) दत्तात्रेयोपनिषद् \hspace{2.7cm} (१२०) बटुकोपनिषद् (बटुकौपनिषद्)
(८७) दत्तोपनिषद् \hspace{3.2cm} (१२१) बह्वृचोपनिषद्
(८८) दुर्वासोपनिषद् \hspace{2.9cm} (१२२) बाष्कलमन्त्रोपनिषद्
(८९) १. देव्युपनिषद् (पद्यात्मक एवं मंत्रात्मक) \hspace{0.5cm} (१२३) बिल्वोपनिषद् (पद्यात्मक)