१०८ उपनिषद् (ज्ञान खण्ड - भाग २)
108 Upanishads Part 2 - Gyan Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
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एक संख्या मानें, तो २१८ ही संख्या होती है। कई (२४) आयुर्वेदोपनिषद्
उपनिषदें एक ही नाम की दो-तीन जगह आयी हैं; (२५) आरुणिकोपनिषद् (आरुणेय्युपनिषद्)
पर वे स्वतन्त्र ग्रन्थ हैं। इस प्रकार सब पर दृष्टिपात (२६) आर्षेयोपनिषद्
करने से यह निश्चित होता है कि अब तक लगभग (२७) आश्रमोपनिषद्
२२० उपनिषदें प्रकाश में आ चुकी हैं। सम्भवतः (२८) इतिहासोपनिषद् (वाक्यात्मक एवं पद्यात्मक)
कहीं और भी कुछ उपनिषदें प्रकाशित हुई हों ? (२९) ईशावास्योपनिषद्
कितनी ही अब भी अप्रकाशित रूप में उपलब्ध हो उपनिषत्स्तुति (शिवरहस्यान्तर्गत, अभी तक
सकती हैं। भारतवर्ष की अथाह ज्ञान सम्पदा के गर्भ अनुपलब्ध है)
में और कितने रत्न छिपे पड़े हैं, यह कहा नहीं जा (३०) ऊर्ध्वपुण्ड्रोपनिषद् (वाक्यात्मक एवं पद्यात्मक)
सकता। यहाँ उपर्युक्त २२० उपनिषदों की नामावली (३१) एकाक्षरोपनिषद्
अकारादि क्रम से दी जा रही है- (३२) ऐतरेयोपनिषद् (अध्यायात्मक)
(१) अक्षमालिकोपनिषद् (अक्षमालोपनिषद्) (३३) ऐतरेयोपनिषद् (खण्डात्मक)
(२) अक्षि- उपनिषद् (३४) ऐतरेयोपनिषद् (अध्यायात्मक)
(३) अथर्वशिखोपनिषद् (३५) कठरुद्रोपनिषद् (कण्ठरुद्रोपनिषद्)
(४) अथर्वशिर उपनिषद् (३६) कठोपनिषद्
(५) अद्वयतारकोपनिषद् (३७) कठश्रुत्युपनिषद्
(६) अद्वैतभावनोपनिषद् (३८) कलिसंतरणोपनिषद् (हरिनामोपनिषद्)
(७) अद्वैतोपनिषद् (३९) कात्यायनोपनिषद्
(८) अध्यात्मोपनिषद् (४०) कामराजकीलितोद्धारोपनिषद्
(९) अनुभवसारोपनिषद् (४१) कालाग्निरुद्रोपनिषद्
(१०) अन्नपूर्णोपनिषद् (४२) कालिकोपनिषद्
(११) अमनस्कोर्पनिषद् (४३) कालीमेधा दीक्षितोपनिषद्
(१२) अमृतनादोपनिषद् (४४) कुण्डिकोपनिषद्
(१३) अरुणोपनिषद् (४५) कृष्णोपनिषद्
(१४) अल्लोपनिषद् (४६) केनोपनिषद्
(१५) अवधूतोपनिषद् (वाक्यात्मक और पद्यात्मक) (४७) कैवल्योपनिषद्
(१६) अवधूतोपनिषद् (पद्यात्मक) (४८) कौलोपनिषद्
(१७) अव्यक्तोपनिषद् (४९) कौषीतकि ब्राह्मणोपनिषद्
(१८) आचमनोपनिषद् (५०) क्षुरिकोपनिषद्
(१९) आत्मपूजोपनिषद् (५१) गणपत्यथर्वशीर्षोपनिषद्
(२०) आत्म प्रबोधोपनिषद् (आत्मबोधोपनिषद्) (५२) गणेशपूर्वतापिन्युपनिषद् (वरदपूर्वतापिन्युप०)
(२१) आत्मोपनिषद् (वाक्यात्मक) (५३) गणेशोत्तरतापिन्युपनिषद् (वरदोत्तरतापिन्यु०)
(२२) आत्मोपनिषद् (पद्यात्मक) (५४) गर्भोपनिषद्
(२३) आथर्वण द्वितीयोपनिषद् (५५) गान्धर्वोपनिषद्
(वाक्यात्मक एवं मन्त्रात्मक) (५६) गायत्र्युपनिषद् (गोपथ ब्राह्मणान्तर्गत)