कबीर के दोहे
ऊँचा पानी ना टिके, नीचे ही ठहराय नीचा होय सो भरि पिये, ऊँचा प्यासा जाय
अर्थ
पानी ऊँचाई पर नहीं टिकता, नीचे ही ठहरता है। जो झुकता है वह भरपेट पीता है और जो अकड़ा रहे वह प्यासा रह जाता है।
रोमन अक्षरों में
uncha paani na tike, niche hi thahraay nicha hoy so bhari piye, uncha pyaasa jaay
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