सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
“सुमिरन से मन लाइए, जैसे नाद कुरंग” — कबीर

पृष्ठभूमि चुनें

कबीर के दोहे

सुमिरन से मन लाइए, जैसे नाद कुरंग कहैं कबीर बिसरे नहीं, प्रान तजे तेहि संग

अर्थ

स्मरण में मन ऐसे लगाओ जैसे हिरण संगीत की ध्वनि में खो जाता है और उसे सुनते-सुनते प्राण तक दे देता है, पर उसे भूलता नहीं।

रोमन अक्षरों में

sumiran se man laaie, jaise naad kurang kahain kabir bisre nahin, praan taje tehi sang

0