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सर्वकोश
“सुखिया सब संसार है, खाए अरु सोवै” — कबीर

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कबीर के दोहे

सुखिया सब संसार है, खाए अरु सोवै दुखिया दास कबीर है, जागै अरु रोवै

अर्थ

सारा संसार खा-पीकर सोने में ही सुखी है। कबीर दुखी हैं, क्योंकि वे सत्य को जानकर जागते हैं और प्रभु के विरह में रोते हैं।

रोमन अक्षरों में

sukhiya sab sansaar hai, khaae aru sovai dukhiya daas kabir hai, jaagai aru rovai

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