सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
“मन मथुरा दिल द्वारिका, काया काशी जाण” — कबीर

पृष्ठभूमि चुनें

कबीर के दोहे

मन मथुरा दिल द्वारिका, काया काशी जाण दसवाँ द्वारा देहुरा, तामे जोति पिछाण

अर्थ

मन ही मथुरा है, दिल ही द्वारका और शरीर ही काशी है। भीतर के दसवें द्वार को मंदिर समझो और उसमें प्रभु की ज्योति को पहचानो।

रोमन अक्षरों में

man mathura dil dvaarika, kaaya kaashi jaan dasvaan dvaara dehura, taame joti pichhaan

0