कबीर के दोहे
लाली मेरे लाल की, जित देखूँ तित लाल लाली देखन मैं गई, मैं भी हो गई लाल
अर्थ
मेरे प्रियतम प्रभु की लाली हर ओर फैली है, जहाँ देखूँ वहीं वह है। उसे देखने गई तो मैं स्वयं उसी रंग में रँग गई।
रोमन अक्षरों में
laali mere laal ki, jit dekhun tit laal laali dekhan main gai, main bhi ho gai laal
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