सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
“कबीर यह घर प्रेम का, खाला का घर नाहिं” — कबीर

पृष्ठभूमि चुनें

कबीर के दोहे

कबीर यह घर प्रेम का, खाला का घर नाहिं सीस उतारै हाथि करि, सो पैठे घर माहिं

अर्थ

प्रेम का घर मौसी का घर नहीं कि कोई भी चला आए। जो अपना अहंकार रूपी सिर उतारकर हाथ में रख दे, वही इसमें प्रवेश कर सकता है।

रोमन अक्षरों में

kabir yah ghar prem ka, khaala ka ghar naahin sis utaarai haathi kari, so paithe ghar maahin

0