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सर्वकोश
“कबीर प्याला प्रेम का, अंतर लिया लगाय” — कबीर

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कबीर के दोहे

कबीर प्याला प्रेम का, अंतर लिया लगाय रोम रोम में रमि रहा, और अमल क्या खाय

अर्थ

प्रेम का प्याला भीतर लगा लिया तो उसका रस रोम-रोम में रम गया। अब किसी और नशे की क्या ज़रूरत।

रोमन अक्षरों में

kabir pyaala prem ka, antar liya lagaay rom rom men rami raha, aur amal kya khaay

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