कबीर के दोहे
कबीर मन निर्मल भया, जैसा गंगा नीर पाछै लागा हरि फिरै, कहत कबीर कबीर
अर्थ
जब मन गंगाजल जैसा निर्मल हो गया, तो प्रभु स्वयं कबीर-कबीर पुकारते हुए पीछे चलने लगे। शुद्ध मन से भगवान स्वयं पास आते हैं।
रोमन अक्षरों में
kabir man nirmal bhaya, jaisa ganga nir paachhai laaga hari phirai, kahat kabir kabir
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