कबीर के दोहे
कबीर खाई कोट की, पानी पिवै न कोइ जाइ मिलै जब गंग में, तब सब गंगोदक होइ
Meaning
किले की खाई का पानी कोई नहीं पीता, पर वही पानी जब गंगा में मिल जाता है तो गंगाजल बन जाता है। अच्छी संगति साधारण को भी पवित्र बना देती है।
In Roman letters
kabir khaai kot ki, paani pivai na koi jaai milai jab gang men, tab sab gangodak hoi
— Sant KabirFrom the SarvaKosh collection.Make your own verse image →
