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सर्वकोश
“झीनी झीनी बीनी चदरिया” — कबीर

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कबीर भजन

झीनी झीनी बीनी चदरिया काहे कै ताना काहे कै भरनी, कौन तार से बीनी चदरिया इंगला पिंगला ताना भरनी, सुखमन तार से बीनी चदरिया आठ कँवल दल चरखा डोलै, पाँच तत्त गुन तीनी चदरिया सो चादर सुर नर मुनि ओढ़ी, ओढ़ि कै मैली कीनी चदरिया दास कबीर जतन करि ओढ़ी, ज्यों कीं त्यों धर दीनी चदरिया

अर्थ

यह शरीर एक बारीक बुनी चादर है, जो पाँच तत्वों और तीन गुणों से बनी है। देवता, मनुष्य और मुनि सबने इसे ओढ़कर मैला कर दिया, पर कबीर ने इसे यत्न से ओढ़ा और जैसी मिली थी वैसी ही लौटा दी।

रोमन अक्षरों में

jhini jhini bini chadriya kaahe kai taana kaahe kai bharni, kaun taar se bini chadriya ingla pingla taana bharni, sukhman taar se bini chadriya aath kanval dal charkha dolai, paanch tatt gun tini chadriya so chaadar sur nar muni odhi, odhi kai maili kini chadriya daas kabir jatan kari odhi, jyon kin tyon dhar dini chadriya

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