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सर्वकोश
“गुरु धोबी शिष कापड़ा, साबुन सिरजनहार” — कबीर

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कबीर के दोहे

गुरु धोबी शिष कापड़ा, साबुन सिरजनहार सुरति सिला पर धोइए, निकसे जोति अपार

अर्थ

गुरु धोबी है, शिष्य कपड़ा और प्रभु का नाम साबुन। ध्यान की शिला पर धोने से भीतर से अपार ज्योति प्रकट होती है।

रोमन अक्षरों में

guru dhobi shish kaapda, saabun sirjanhaar surti sila par dhoie, nikse joti apaar

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