कबीर के दोहे
धीरे धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय
अर्थ
हे मन, धैर्य रखो, हर काम अपने समय पर होता है। माली चाहे सौ घड़े पानी डाले, फल तो मौसम आने पर ही लगते हैं।
रोमन अक्षरों में
dhire dhire re mana, dhire sab kuchh hoy maali sinche sau ghada, ritu aae phal hoy
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