कबीर के दोहे
देह धरे का दंड है, सब काहू को होय ज्ञानी भुगते ज्ञान से, अज्ञानी भुगते रोय
अर्थ
शरीर मिला है तो कष्ट सबको होते हैं। ज्ञानी उन्हें समझ के साथ धैर्य से सहता है और अज्ञानी रो-रोकर।
रोमन अक्षरों में
deh dhare ka dand hai, sab kaahu ko hoy gyaani bhugte gyaan se, agyaani bhugte roy
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