कबीर के दोहे
बिरहा बिरहा मति कहो, बिरहा है सुलतान जिहि घट बिरह न संचरै, सो घट सदा मसान
अर्थ
विरह को छोटा मत समझो, विरह तो सुलतान है। जिस हृदय में प्रभु के विरह की पीड़ा नहीं, वह सदा श्मशान जैसा सूना है।
रोमन अक्षरों में
birha birha mati kaho, birha hai sultaan jihi ghat birah na sanchrai, so ghat sada masaan
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