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सर्वकोश
“अकथ कहानी प्रेम की, कछू कही न जाय” — कबीर

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कबीर के दोहे

अकथ कहानी प्रेम की, कछू कही न जाय गूँगे केरी सरकरा, खाय और मुसकाय

अर्थ

प्रेम की कहानी कही नहीं जा सकती, जैसे गूँगा शक्कर खाकर उसका स्वाद बता नहीं पाता, बस मुस्कुरा देता है।

रोमन अक्षरों में

akath kahaani prem ki, kachhu kahi na jaay gunge keri sarakra, khaay aur muskaay

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