कबीर के दोहे
आए हैं सो जाएँगे, राजा रंक फकीर एक सिंहासन चढ़ि चले, एक बँधे जात जंजीर
अर्थ
राजा हो, गरीब हो या फकीर, जो आया है वह जाएगा। फर्क इतना है कि कोई अपने कर्मों से सम्मान पाकर जाता है और कोई बंधनों में बँधकर।
रोमन अक्षरों में
aae hain so jaaenge, raaja rank phakir ek sinhaasan chadhi chale, ek bandhe jaat janjir
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